वायुसेना ने द्वीप में फंसे 19 लोगों को सुरक्षित निकाला, मेघालय में बाढ़ की चेतावनी

भारी बारिश के कारण धेमाजी में सियांग नदी उफान पर

ईटानगर : चीन के द्वारा बांगड़ का पानी छोड़े जाने के बाद अरूणाचल प्रदेश में बाढ़ से प्रभावित एक द्वीप से वायुसेना ने हवाई मार्ग से फंसे 19 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया,

जबकि असम के धेमाजी जिले से 200 से अधिक लोगों को बचाया गया। अधिकारियों ने बताया कि भारी बारिश के कारण धेमाजी में सियांग नदी उफान पर है।

मेघालय के तीन जिलों में भी बाढ़ की चेतावनी जारी की गई है। सियांग नदी मूल रूप से तिब्बत से निकलती है और चीन में इसे त्संगपो के रूप में जाना जाता है। यह लोहित और दिबांग नदी के साथ मिलकर असम में ब्रहमपुत्र नदी में तब्दील हो जाती है।

पूर्वी सियांग के जिला आयुक्त तामियो तताक ने बताया कि अरुणाचल के पूर्वी सियांग जिले में पिछले 24 घंटों से फंसे 19 लोगों को बचाया गया। जिला प्रशासन के अनुरोध पर वायुसेना ने बचाव अभियान चलाया।

उन्होंने बताया कि अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने ईटानगर से व्यक्तिगत तौर पर बचाव अभियान पर नजर रखी। उन्होंने बताया कि लोकसभा सांसद निनोंग इरिंग और पासीघाट पश्चिम से विधायक तातुंग जमोह के साथ पुलिस और स्थानीय लोगों ने पशुओं को बचाने में मदद की।

राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) के जवानों द्वारा बचाए गए 200 अन्य लोग पूर्वी सियांग के निकट धेमाजी में खेती के लिए चले गए थे।

सियांग में पानी का स्तर बढऩे के बाद पूर्वी सियांग और असम में सीमावर्ती धेमाजी, लखीमपुर और डिब्रूगढ़ जिलों में गुरुवार को अलर्ट जारी किया गया था। अरुणचाल के विधायक लोंबो तेयांग ने कहा कि पूर्वी सियांग के मेबो क्षेत्र में नदी के किनारे रह रहे करीब 1000 परिवार प्रभावित हुए हैं। तेयांग ने भरोसा दिया कि सभी पुर्निनमाण के लिए एक-एक लाख रुपए दिए जाएंगे।

एक अधिकारी ने बताया कि मेघालय में पश्चमी गारो हिल्स, उत्तरी गारो हिल्स और दक्षिण गारो हिल्स के उपायकुत को सतर्कता बरतने के लिए कहा गया है। साथ ही अगले 24 घंटों में किसी आपात स्थिति से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन टीमों को तैयार रहने को कहा गया है।

राजस्व और आपदा प्रबंधन के एक अधिकारी ने तीनों जिलों के उपायुक्तों को भेजे गए एक जरूरी संदेश में कहा है कि चीन सरकार की ओर से अधिक पानी छोड़े जाने के कारण ब्रह्मपुत्र के जलस्तर अभूतपूर्व वृद्धि हो सकती है।

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