मंगल ग्रह पर दिखी ‘बर्फ’, अचंभित वैज्ञानिक बोले, लेकिन ये पानी नहीं

हाल ही में नासा ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कुछ तस्वीरें शेयर की, जिसमें ऐसा बताया जा रहा है कि मंगल ग्रह के दक्षिणी ध्रुव पर बर्फ की झील दिखाई दे रही है। इस तस्वीरों को देखकर ऐसा लग रहा है मानो मंगल ग्रह पर भी धरती की तरह ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका की तरफ विशाल मात्रा में बर्फ जमी हुई है, लेकिन अब वैज्ञानिकों ने संशय जताते हुए कहा है कि यह इस बात को लेकर पूरी तरह अभी अभी आश्वस्त नहीं हो सकती है कि तस्वीरों में दिखाई दे रही बर्फ, पानी ही हो। नासा के वैज्ञानिकों ने अब एक नया खुलासा करते हुए कहा है कि जब बारीकी से इन तस्वीरों और राडार सिग्नलों की जांच की तो पता चला कि ये चिकनी मिट्टी भी हो सकती है। नए रिसर्च पेपर्स में अब यह दावा किया गया है कि मंगल ग्रह पर मौजूद झीलों को सुखाने में चिकनी मिट्टी का भी बड़ा योगदान हो सकता है।

मंगल के दक्षिणी ध्रुव का अध्ययन कर रहे हैं 80 वैज्ञानिक

मंगल ग्रह के दक्षिणी ध्रुव का अध्ययन कर रहे दुनियाभर के 80 वैज्ञानिक हाल ही में अर्जेंटीना के दक्षिणी तट उशुआइया इलाके में इकट्टा हुए थे। इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन मार्स पोलर साइंस एंड एक्सप्लोरेशन आयोजन मंग्रह ग्रह पर दुनियाभर में किए गए अध्ययनों को एकदूसरे के साथ बांटने के उद्धेश्य से किया गया था। इस दौरान खगोल वैज्ञानिक रॉबर्टो ओरोसेई और जेफरी प्लॉट ने कहा कि हम दोनों ने मार्स एडवांस्ड रडार फॉर सबसरफेस एंड आयनोस्फेयरिक साउंडिंग के जरिए दक्षिणी ध्रुव का अध्ययन करना शुरू किया, तब पता चला कि जिसे हम बर्फीली झील मान रहे हैं, वह चिकनी मिट्टी भी हो सकती है। साथ ही उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि हम यह बिल्कुल भी नहीं कह रहे हैं कि मंगल ग्रह के दक्षिणी ध्रुव पर पानी या सतह के नीचे बर्फीली झीलें नहीं होंगी, लेकिन चिकनी मिट्टी की थ्योरी को नकारा नहीं जा सकता है।

2015 में मार्स रिकॉनसेंस ऑर्बिटर ने भेजी थी तस्वीरें

गौरतलब है कि वर्ष 2015 में मार्स रिकॉनसेंस ऑर्बिटर ने मंगल ग्रह के ऊंचे पहाड़ों से गीली रेत को फिसलते और अपना आकार बदलते देखा था। तब यह अनुमान लगाया गया था कि शायद पानी के बहाव के कारण ऐसा हो रहा है, लेकिन जब हाई रेजोल्यूशन इमेजिंग साइंस एक्सपेरीमेंट के जरिए जांच की गई तो खुलासा हुआ कि वह सूखी रेत है, जो अपना आकार लगातार तेज हवा के कारण बदलती है। इसके अलावा मंगल ग्रह पर तरल पानी की संभावनाओं को इसलिए भी खारिज किया जा रहा है क्योंकि मंगल ग्रह पर इतनी ज्यादा ठंड है कि वहां पर पानी तरल रूप में रह ही नहीं सकता। यह स्टडी जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स में प्रकाशित हुई थी।

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