आखिरकार क्यों इंडियन माता-पिता को आकर्षित करते हैं NRI दूल्हे ?

भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय के तहत आने वाली इकाई भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर) देश में मौजूद एनआरआई (प्रवासी भारतीय) दुल्हनों पर शोध करने की योजना बना रही है.

नई दिल्ली : जब बात शादी की आती है तो अक्सर कहा जाता है कि अरेंज मैरिज बेस्ट होती है. अरेंज मैरिज में एक माता-पिता अपनी बेटी के लिए सही जीवन साथी चुनते है, 99 फीसदी मामलों में यह बात सच भी साबित होती है.

जब बात अरेंज मैरिज की होती है तो ज्यादातर माता-पिता की पहली पसंद एनआरआई लड़के ही बनते है. कभी मन में ख्याल आया है कि आखिरकार क्यों एनआरआई लड़के ही माता-पिता की पहली पसंद क्यों बनते हैं,

एक मां कभी भी अपने कलेजे के टुकड़े को इतनी दूर नहीं भेजना चाहेगी जहां से महीनों तो क्या सालों तक उसकी मुलाकात ना हो पाए, तो आखिरकार क्यों है एनआरआई दूल्हा परिवार का फेवरेट बनता है.

इन सभी जवाबों की तलाश करने के लिए जल्द ही भारत सरकार एनआरआई दूल्हों पर एक सर्वे करने वाली है. भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय के तहत आने वाली इकाई भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर) देश में मौजूद एनआरआई (प्रवासी भारतीय) दुल्हनों पर शोध करने की योजना बना रही है.

एनआरआई दूल्हनों पर किए जाने वाली रिसर्च के बारे में आईसीएसएसआर अध्यक्ष बी बी कुमार का कहना है ‘प्रवासी भारतीय पुरुषों का अपने देश आकर शादी करने का चलन काफी पुराना है लेकिन ऐसी शादियां हमेशा सफल नहीं होती हैं’. ऐसे बहुत से मामले हैं जब दूल्हे ने अपनी दुल्हन को यहां छोड़ दिया है या फिर अपने बारे में गलत जानकारी दी हो.

सरकार हो या फिर परिवार हर कोई इस बात से वाकिफ है, इसके बाबजूद परिवार विदेशी दूल्हों को तवज्जों देता है. ऐसी शादियों को लेकर केंद्र सरकार के पास कोई एक परफेक्ट डाटा नहीं है जो इस बात को प्रूफ कर सके कि आखिरकार कुछ सालों बाद उस शादी की स्थिति क्या थी.

उन लड़कियों के साथ क्या हुआ जिन्होंने एनआरआई दुल्हन बनाने का ख्याब तो देखा लेकिन उनके हाथ लगा तो सिर्फ धोखा. क्या एक माता-पिता को विदेशी दूल्हा चुनने के लिए मानदंड की आवश्यकता है. इस शोध में इन सभी बिंदुओं का ध्यान रखा जाएगा.

कुमार ने कहा, “ माता-पिता को प्रवासी दूल्हे क्यों आकर्षित करते हैं? विदेश में फैंसी लाइफस्टाइल के अलावा कौन सी अन्य चीजों पर वह विचार करते हैं? हम लोग जानकारियां कैसे सत्यापित करेंगे? शोध के दौरान इन सभी कारकों का भी आकलन किया जाएगा.”

कुमार ने यह भी बताया कि फिलहाल अभी इस प्रोजेक्ट को केंद्र सरकार की ओर से मंजूरी नहीं मिली है. अगर केंद्र सरकार इस प्रोजेक्ट को मंजूरी देती है वह इस पर काम करना शुरू करेंगे.

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