छत्तीसगढ़जॉब्स/एजुकेशनबिज़नेसराष्ट्रीय

आइडिया पिच करने का प्लेटफॉर्म ‘शुरुआत बस’आ रही है आपके शहर रायपुर में

ये है आपने आइडिया को सफलता की उड़न देने का सही मौका

नई दिल्ली : आज की तारीख में हमारे देश की सबसे बड़ी समस्या पूछी जाए, तो शायद ज़्यादातर लोग बेरोजगारी बताएंगे. हमारे मुल्क की आबादी ही इतनी है. एक आंकड़े के मुताबिक भारत में अभी हर महीने 13 लाख नौकरियों की ज़रूरत है. पर इस तस्वीर का एक और पहलू भी है. सोचिए जहां इतने सारे लोग हैं, वहां कितने सारे इनोवेटिव आइडियाज़ होंगे. कितने सारे लोग होंगे, जिनमें बिजनेस करने की काबिलियत होगी और स्टार्टअप्स के प्लान होंगे. इन्हें ज़रूरत है तो सिर्फ प्लेटफॉर्म की.

दि ग्लोबल एजुकेशन ऐंड लीडरशिप फाउंडेशन (tGELF) ने नीति आयोग के साथ मिलकर ‘शुरुआत बस’ की पहल की है. इस प्रोग्राम के तहत देश के अलग-अलग शहरों में एक बस चलाई जा रही है, जो स्कूल और कॉलेज के बच्चों को अपना आइडिया पिच करने का प्लेटफॉर्म देती है. एंटरप्रेन्योर बनने का टारगेट रखने वाले लोगों को एक्सपोज़र, सपोर्ट और मेंटरिंग की सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है. इस बस स्टूडेंट्स और बाकी लोगों को कंपनियों के एग्जिक्यूटिव्स और इन्वेस्टर्स से मिलने का मौका देती है.

‘शुरुआत बस’ क्या है
आपको पास एक इनोवेटिव आइडिया है. आपको लगता है कि आपके एक फुलप्रूफ बिजनेस मॉडल है. लेकिन आपको ये नहीं पता है कि इसे किसके सामने और कैसे प्रेज़ेंट करना है. ‘शुरुआत बस’ यही करने में आपकी मदद करेगी. tGELF ने इसे नीति आयोग के अटल इनोवेशन मिशन के साथ मिलकर शुरू किया है. 2017 में अपने पहले साल में ये बस दिल्ली, अहमदाबाद, मुंबई, पुणे, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे बड़े-बड़े शहरों में गई थी. अब 2018 में अपने दूसरे लेग में इसका टारगेट देश की टियर-2 सिटी हैं.

‘शुरुआत बस’ का इस साल का रूट क्या है
इस साल बस का रूट 11 अप्रैल को दिल्ली से शुरू हुआ था, जो 18 अप्रैल तक जयपुर, टोंक, इंदौर और भोपाल जा चुकी है. 20-21 अप्रैल को ये बस रायपुर में रहेगी, 24 अप्रैल को कानपुर पहुंचेगी और 25-26 अप्रैल को लखनऊ में इसका रूट खत्म होगा.

शुरुआत बस के बारे में कुछ जानकारी
इस बस में इनोवेशन ज़ोन, पिचिंग ज़ोन, कॉन्फ्रेंस रूम और सिटिंग एरिया बनाया गया है. इनोवेशन ज़ोन में स्टूडेंट्स अपने मॉडल प्रेज़ेंट करते हैं, जबकि पिचिंग ज़ोन में उन्हें जूरी के सामने अपना आइडिया पिच करने के लिए 100 सेकेंड का वक्त दिया जाता है. इससे स्टूडेंट्स किसी के सामने अपना आइडिया प्रेज़ेंट करना सीखते हैं और उन्हें ऐसे लोगों से मिलने का मौका मिलता है, जो स्टार्टअप में उनकी मदद कर सकते हैं.

पिचिंग कॉम्पिटीशन क्या है
स्कूली बच्चों के बीच पिचिंग कॉम्पिटीशन कराने के लिए ये बस जिस शहर पहुंचती है, वहां का कोई एक स्कूल सेलेक्ट करती है. इसके लिए वही स्कूल चुना जाता है, जहां अटल थिंकिंग लैब स्टैबलिश की गई हो. इसके अलावा बाकी स्कूलों तक जानकारी पहुंचाई जाती है, ताकि वहां के बच्चे भी इसका हिस्सा बन सकें. कॉम्पिटीशन में बच्चों को जूरी के सामने अपना आइडिया रखने के लिए 100 सेकेंड का वक्त दिया जाता है. जूरी जिन बच्चों को चुनती है, उन्हें नेशनल लेवल के कॉम्पिटीशन का हिस्सा बनने का मौका मिलता है.

कॉलेज लेवल पर बस किसी कॉलेज या अटल इनक्यूबेशन सेंटर जाती है, जहां बाकी कॉलेज के स्टूडेंट्स और दूसरे लोग आ सकते हैं. यहां भी 100 सेकेंड वाला पिचिंग कॉम्पिटीशन कराया जाता है. इसके विनर्स को नीति आयोग के फैसले के मुताबिक अवॉर्ड्स दिए जाते हैं.

अटल थिंकिंग लैब क्या है
अटल थिंकिंग लैब केंद्र सरकार का वो प्रोग्राम है, जिसके तहत स्कूलों में वर्कशॉप कराई जाती हैं. इनमें छठी से 12वीं क्लास तक के बच्चे शामिल होते हैं. इसका मकसद बच्चों में साइंटिफिक टेंपरामेंट, इनोवेटिव स्किल्स और आइडिया डेवलप करना है, जिससे वो भारत को ट्रांसफॉर्म करने में अपना योगदान दे सकें. लैब में होने वाली एक्टिविटी इस तरह डिज़ाइन की गई हैं कि वो स्टूडेंट्स के रेगुलर सिलेबस और टेक्स्ट बुक लर्निंग से अलग हैं. ये वर्कशॉप कुछ चुनिंदा स्कूलों में ही कराई जाती है. वहीं अटल इनक्यूबेशन सेंटर में इसी तरह स्टार्ट-अप बिजनेस में इंट्रेस्टेड लोगों पर काम किया जाता है.

स्टूडेंट्स को ‘शुरुआत बस’ से क्या फायदा है
फायदा ये है कि इस पूरे प्रॉसेस के दौरान बिजनेस मॉडल रखने वाले स्टूडेंट्स को जूरी के लोगों और अलग-अलग कंपनियों के एग्जिक्यूटिव्स से मिलने का मौका मिलता है. ये लोग स्टूडेंट्स के मॉडल में सुधार करने और उनका विज़न क्लियर करने में मदद करते हैं. अगर किसी कंपनी को कोई आइडिया इन्वेस्ट करने लायक लगता है, तो वो स्टूडेंट के आइडिया में इन्वेस्ट भी करती है.

एक सक्सेस स्टोरी जानना चाहेंगे?
अहमदाबाद में रहने वाले ऋषभ को ऑनलाइन फूड ऑर्डर करने में दिक्कत होती थी. कई ऐप्स होती थीं, जिनमें पेमेंट, खाना पहुंचने में टाइम लगने और OTP वगैरह का झंझट होता था. ऋषभ ने देखा कि इससे ढेर सारे लोगों को दिक्कत हो रही है. तो उन्होंने एक टू-वे स्मार्ट पॉइंट ऑफ सेल सिस्टम तैयार किया, जिससे खाना ऑर्डर करना और उसका पेमेंट करना बेहद आसान हो गया. लेकिन उनके इस आइडिया को एक कंप्लीट बिजनेस में बदलने में tGELF और ‘शुरुआत बस’ ने मदद की. ऋषभ के मुताबिक इससे उन्हें पहचान मिली और इन्वेस्टमेंट भी मिला. फाउंडेशन और बस ही वो ज़रिया थी, जिससे वो ढेर सारे असरदार लोगों तक पहुंच पाए.
ये एक ऋषभ की कहानी है. ‘शुरुआत बस’ से फायदा पाने वाले ऐसे ढेर सारे लोग हैं.

क्या है ये फाउंडेशन
सन ग्रुप वाली खेमका फैमिली ने 2005 में दि नंद ऐंड जीत खेमका फाउंडेशन की स्थापना की. फिर इसी फैमिली की गौरी ईश्वरन ने 2006 में tGELF की स्थापना की. 2008 में तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह ने इसका उद्घाटन किया था. इस फाउंडेशन का मकसद युवाओं में लीडरशिप क्वॉलिटी डेपलप करना है, जो पैसों के साथ-साथ एथिकली भी कुछ बेहतर कर सकें. इसी मकसद ने फाउंडेशन ने 2017 में ‘शुरुआत बस’ की पहल की.

Tags
advt

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.