विचार, भोजन और मित्र सात्विक होना चाहिए : शंकराचार्य स्वरूपानन्द सरस्वती

- खबरीलाल रिपोर्ट

वृंदावन : अष्टमी तिथि होने के कारण अनाध्याय था जिस हेतु पूज्य शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज से मिलने श्री शंकराचार्य निवास, वृंदावन में भक्तों का तांता लगा हुआ था। महाराजश्री से मिलने आये भक्तों से उन्होंने कहा कि किसी भूखे को खाना खिलाना, किसी प्यासे को पानी पिलाना यह ऐसे कर्म हैं जिससे मन खुद ब खुद प्रसन्न हो जाता है। मन खुद ही कहता है कि आज हमने एक अच्छा कार्य किया। इसी चंचल रूपी मन को ही वश में करना है क्यों कि वह इधर उधर खूब भागता है।

महाराजश्री ने आगे अपने प्रवचन में उपस्थित भक्तों के उद्देश्य में कहा कि सात्विक सुख प्राप्त करना बहुत जरूरी है, तभी पाप कार्य बन्ध होंगे, क्यों कि जब तक व्यक्ति का मन सात्विक रहेगा उसका मन कहीं और नही भटकेगा। मन, शरीर तभी सात्विक होंगे जब व्यक्ति सात्विक भोजन ग्रहण करेगा, उनके मित्र भी सात्विक होंगे और साथ ही सत्संग भी करेगा। गलत लोग गलत रास्ते पर ले जाते हैं इसलिए जो मित्र व्यक्ति को गलत रास्ते पर चलने के लिए कहे यह प्रोत्साहित करे वह मित्र नहीं अपितु आपका परम् शत्रु है। मित्र वही होता है जो सच्चाई के मार्ग पर चलने की सलाह दे , इसलिए कहते हैं कि सच्चा साथी चुनने के लिए विवेक होना जरूरी है।

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