पहले समाज सेवक के रूप में बनाई पहचान, फिर एक करोड़ 66 लाख का लगाया चूना

- आरोपी ने 9 लोगों का फर्जी जमीं का पेपर बनाया

कोरबा।

गरीबों की मदद कर अब तक समाज के सामने मसीहा बना फिर रहे महाठग शंकर रजक की जालसाजी की कहानी एक-एक कर सामने आ रही। इस बार एक रिटायर्ड आइबीपी अधिकारी व उसकी पत्नी को एक करोड़ 66 लाख रुपये का चूना लगाए जाने का मामला सामने आया है।

सरईपाली और बुड़बुड़ में कोयला खदान खुलने से जमीन अधिग्रहित होने का फायदा गिनाते हुए शंकर ने नौ लोगों का फर्जी जमीन का नक्शा-खसरा व प्रमाणीकरण दस्तावेज तैयार किया और रजिस्ट्री हो जाने का झांसा देकर दंपती से अपने बैंक खाते में राशि जमा करा लिया। कटघोरा हुंकरा में रहने वाला शंकर रजक एक साल पहले तक क्षेत्र के लोगों के सामने एक बड़े समाज सेवक के रूप में पहचान रही है।

कोसगई सेवा समिति के नाम पर वह न केवल निःशुल्क एंबुलेंस सेवा दे रहा था बल्कि गरीब परिवारों के घर वह खुद पहुंच जाता और बेटी के हाथ पीले करने सहयोग प्रदान करता था। बीमार लोगों को भी मदद किया करता था। इस वजह से हुंकरा में बनाए गए आलीशन मंदिर परिसर में लोगों की भीड़ लगी रहती थी। जिस व्यक्ति को लोग मसीहा समझते थे वह साधु के रूप में शैतान निकला है।

अभी ताजा मामले में बांकीमोंगरा में रहने वाले आइबीपी के रिटायर्ड अधिकारी एलेक्सिव और उसकी पत्नी शांति कुजूर ने कुसमुंडा थाने में उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। बताया जा रहा है कि पहली मुलाकात में ही उसने प्रभावशाली बात करते हुए अपनी ऊंची पहुंच का हवाला दिया। दरअसल शंकर के समाज सेवक की छवि की वजह से श्री कुजूर उसकी बातों पर यकीन करने लगा। शंकर ने वर्ष 2014 में जमीन पर निवेश करने की सलाह देते हुए बताया कि एसईसीएल कंपनी की खदान सरईपाली व बुड़बुड़ में खुलने वाली है।

श्री कुजूर को कहा कि यहां जमीन खरीदकर रख लो, आने वाले समय में तीन गुना मुआवजा मिलेगा और साथ ही परिवार के कई लोगों को नौकरी भी मिल जाएगी। रिटायरमेंट की राशि श्री कुजूर ने जमीन खरीदने में खर्च करने की ठान ली। दंपती के नाम से नौ अलग-अलग फर्जी जमीन के दस्तावेज तैयार कर दोनों गांव के 20 एकड़ जमीन का फर्जी पुलिंदा तैयार कर सौंप दिया।

नकद दो लाख रुपये बतौर एडवांस लिया गया था। दस्तावेज मिलने के बाद श्री कुजूर ने अलग-अलग किश्त में एक करोड़ तीन लाख और श्रीमती कुजूर ने 63 लाख रुपये जमा किया। वे इस बात से बेफिक्र थे कि सरकारी सील व हस्ताक्षर वाले दस्तावेज उनके पास है, लेकिन उस वक्त उनके होश उड़ गए, जब शंकर के खिलाफ कवर्धा में बीते वर्ष इसी तरह के ठगी का मामला पंजीबद्ध किया गया।

अपने दस्तावेजों की जांच के लिए राजस्व विभाग पहुंचे तो होश फाख्ता हो गए, सभी दस्तावेज फर्जी निकले। इस घटना की शिकायत कुसमुंडा थाना में की गई थी, जांच के बाद पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला पंजीबद्ध कर लिया है। आरोपी पहले से ही कटघोरा उपजेल में बंद है।

पुत्र अजय व रवि लेते थे विश्वास में

शंकर रजक की ठगी में उसके पुत्र अजय व रवि रजक की भी भूमिका सामने आई है। जालसाज पिता का पूरा साथ दोनों पुत्र दे रहे थे। जब कभी भी किसी को शिकार बनाया जाता तो अजय और रवि उसे विश्वास में लेने का काम करते थे। इसके अलावा शंकर के सबसे नजदीकी सिद्धार्थ महंत फर्जी दस्तावेज तैयार करने में माहिर था। कुसमुंडा पुलिस ने शंकर के साथ सभी को आरोपी बनाया है।

पटवारी, तहसीलदार सभी के फर्जी सील-हस्ताक्षर

सरईपाली व बुड़बुड़ गांव पाली तहसील के अंदर आता है, इसलिए उसी क्षेत्र के आरआई, पटवारी व तहसीलदार के फर्जी हस्ताक्षर वाले दस्तावेज तैयार किए गए। नौ अलग-अलग फर्जी ऋण पुस्तिका के अलावा बी-वन खसरा व नक्शा भी फर्जी तैयार किया गया। शिकायतकर्ता के अनुसार उन नौ ग्रामीणों से भी मिलाया गया था, जिन्होंने अपनी जमीन बेचने की बात कही थी। बाद में जांच के दौरान जमीन बेचने वाले सभी का नाम पता फर्जी निकला। रकबा, खसरा नंबर भी काल्पनिक थे। पुलिस अभी इस बात का पता लगी रही है कि वे नौ आरोपी कौन हैं जो जमीन विक्रेता बनकर खड़े हुए थे।

रजिस्ट्री हो गई कार्यालय से मिलेगा दस्तावेज

शंकर ने फर्जी राजस्व दस्तावेज थमाने के बाद यह भी झांसा दिया था कि सभी जमीन की रजिस्ट्री उनके नाम पर कर दी गई है। रजिस्ट्रार कार्यालय से दस्तावेज मिलने में वक्त लगता है, मिलते ही उन्हें दे दिया जाएगा। इस तरह फर्जीवाड़े का जाल बिछाया गया कि अच्छा खासा जानकार व्यक्ति भी इनके झांसे में आ जाए।

तीन माह पहले इस मामले में हुई गिरफ्तारी

आइए अब बताते हैं शंकर रजक ने अब तक कितने लोगों को कितना चूना लगाया है। कवर्धा जिले के एक दर्जन बेरोजगारों को एसईसीएल में नौकरी मिलने का झांसा देकर जमीन के फर्जी दस्तावेज थमाकर 60 लाख ऐंठा। वहां भी लोगों को सरईपाली में कोयला खदान खुलने की बात कह शिकार बनाया।

दीपका में रहने वाले एक एसईसीएल कर्मी व उसके महाराष्ट्र रिश्तेदारों से भी एक करोड़ 83 लाख की ठगी की। इस तरह करोड़ों रुपये की ठगी का मामला अब तक सामने आ चुका है। 25 मार्च को दीपका थाने में दर्ज मामले में गिरफ्तार किए गए शंकर व उसके साथी सिद्धार्थ महंत की जमानत अब तक नही हुई है |

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