क्रिकेट का विरोध नहीं होता, तो आज ऐसा हालात खड़े नहीं होते

यदि यहां भारत-पाकिस्तान के नाम पर क्रिकेट का विरोध नहीं होता, तो आज ऐसा हालात खड़े नहीं होते।

पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान क्रिकेट भी चर्चा का केंद्र है। कश्मीर को लेकर कहा जाता है कि भारत-पाक तनाव ने यहां क्रिकेट को भी पनपने नहीं दिया।

श्रीनगर में शेर-ए-कश्मीर क्रिकेट स्टेडियम है, लेकिन यहां महज दो अंतर्राष्ट्रीय मैच खेले गए। जानकार बताते हैं कि यदि यहां भारत-पाकिस्तान के नाम पर क्रिकेट का विरोध नहीं होता, तो आज ऐसा हालात खड़े नहीं होते।

नियमित क्रिकेट मैच होने से लोगों को रोजगार मिलता। स्थानीय युवाओं क्रिकेट में रुचि बढ़ती और वे दुनिया में नाम कमा सकते थे। बहरहाल, जानिए ऐसा क्यों नहीं हो पाया।

पहले ही मैच में लगे पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे

इस स्टेडियम पर पहला अंतर्राष्ट्रीय मैच 13 अक्टूबर 1983 को भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेला गया था।

भारत ने पहले बल्लेबाजी की, लेकिन लंच के दौरान कश्मीरियों का विरोध भड़क गया और उन्होंने पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाते हुए पिच खोद दी। हालांकि इसके बाद भी खेल हुआ।

भारत ने 177 रन का लक्ष्य दिया। वेस्टइंडीज ने 22.4 ओवर में बिना किसी नुकसान के 108 रन बनाए, जिसके बाद बारिश ने मैच रोक दिया।

हालात सुधरे तो वेस्टइंडीज को 22 ओवर में 81 रन टारगेट मिला, जिसे वह पहले ही हासिल कर चुका था। नाबाद 55 रन बनाने वाले डेसमेंड हेंस को मैन ऑफ द मैच चुना गया था।

दूसरा मैच 9 सितंबर 1986 को भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुआ था। भार ने पहले बल्लेबाजी की और सुनील गावस्कतर के 56 गेंदों पर 52 रन की बदौलत 8 विकेट पर 222 रन का स्कोर बनाया।

जवाब में ऑस्ट्रेलिया ने 6 गेंद शेष रहते तीन विकेट बाकी रहते लक्ष्य हासिल कर लिया।

इसके बाद 18 तक यह स्टेडियम सीआरपीएप का ठिकाना बना रहा। घाटी में आतंकवाद के निशान यहां साफ देखे जा सकते हैं। स्टेडियम की खिड़कियां गोलियों से छलनी हो चुकी है। अब यहां राजनीतिक रैलियां होती हैं।

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