आधार कार्ड नहीं तो स्कूलों में नहीं मिलेगा मिड-डे का खाना

जयपुर. वसुंधरा सरकार ने एक आदेश जारी कर सभी सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का आधार कार्ड बनाने को कहा है। केंद्र सरकार ने आधार कार्ड को बनाने के नियम का हवाला देकर साफ कर दिया है की, मिड-डे मिल अब उन्हीं बच्चों को मिलेगा जिनका आधार कार्ड होगा।

सरकार खुद जानती है की, ना तो अगले पांच वर्किंग डे में वह लाखों बच्चों का आधार कार्ड बनवा सकती हैं और ना ही इसके लिए उन्होंने पूर तैयारियां की हुई हैं। लेकिन फिर भी उन्होंने ये फरमान जारी कर दिया है कि जिन बच्चों के पास आधार कार्ड नहीं होगा उन्हें 30 जून के बाद मिड डे मिल नहीं मिलेगा।

शिक्षा अधिकारी द्वारा अपने जिले के सभी स्कूलों के लिए जारी किया गया वह फरमान जिसने अध्यापकों के साथ साथ सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों की परेशानियां भी बढ़ा दी हैं।

दरअसल सरकारी आंकड़े बताते हैं की, सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले केवल 33 फीसदी विद्यार्थियों का ही आधार कार्ड बन पाया है या फिर कार्ड के लिए नामांकन हो पाया है। शनिवार और रविवार की छुट्टियों को मिला दिया जाए तो केवल 5 दिन बचते हैं जिसे सभी का आधार कार्ड बनना संभव नहीं है। साथ ही सरकार ने भी बच्चो और उनके अभिभावकों को जानकारी देने के लिए समुचित तरीके से इसे लेकर कोई प्रचार प्रसार नहीं किया है।

आंकड़े यह भी बताते हैं की राजस्थान में 49,816 प्राथमिक और 13,653 माध्यमिक में कुल 77 लाख 35 हज़ार छात्र- छात्राएं पढ़ते हैं जिसमें से माध्यमिक शिक्षा में 75 फीसदी छात्रों का आधार कार्ड के लिए नामांकन हो चुका है। जबकि जबकि दूर दराज के इलाकों में स्थित प्राथमिक स्कूलों में यह संख्या अभी 33 से 35 फीसदी पर ही अटकी हैं और इन्हीं जगह सबसे ज्यादा मिड डे मिल की योजना चलायी जाती है।

सरकारी विद्यालयों में मिड डे मील योजना के अंतर्गत कुक कम हेल्पर को भी अपना आधार कार्ड बनवाना होगा। इसमें कर्इ कुक कम हेल्पर के बैंक खाते तो हैं, लेकिन आधारकार्ड से लिंक नहीं है। ऐसे में आधारकार्ड नहीं होने पर उनका वेतन भी रोका जा सकता है।

हालांकि प्रदेश के बाल कल्याण आयोग की अध्यक्ष का कहना है कि, आधार कार्ड तो बनवाना जरूरी है लेकिन, सरकार इस तारीख को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी ताकि बच्चों को मिड डे मील मिलने में किसी तरह की दिक्कत ना हो।

जाहिर है की प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले सभी बच्चों को आधार कार्ड अनिवार्य करने का फैसला बेशक अच्छे सोच को दर्शाता हो लेकिन आनन फनाना में लागु करने और जरूरतमंद विद्यार्थियों को इसके अभाव में मिड-डे मिल योजना से वंचित करने का फैसला कतई जायज नहीं ठहराया जा सकता।

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