छत्तीसगढ़राजनीति

रमन को वाकई मजदूरों की फिक्र होती तो सीधे PM मोदी से बात करते- शुक्ला

शुक्ला ने कहा कि भाजपा का चरित्र मजदूर व गरीब विरोधी है।

रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता व संचार विभाग के सदस्य सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह द्वारा प्रवासी मजदूरों के संबंध में की जा रही बयानबाजी घड़ियाली आंसू से ज्यादा कुछ नहीं। रमन सिंह को मजदूरों की इतनी ही फिक्र होती तो वे कोरी बयानबाजी नहीं करते और न ही छत्तीसगढ़ के बार्डर में जा कर फोटो खिंचवाने का काम करते। इस मामले में उन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से सीधे बात करना चाहिए था। मजदूरों के नाम पर वे केवल राजनीति कर रहे हैं।

केंद्र की भाजपा सरकार ने तीन महीने में भी मजदूरों की वापसी के लिये कोई नीति नही बनाई

सुशील आनंद शुक्ला ने एक बयान जारी कर कहा कि प्रवासी मजदूरों की समस्या अन्तर्राज्यीय मसला है। इनकी वापसी के बारे में केंद्र सरकार को एक राष्ट्रीय नीति बनानी थी। दुर्भाग्य से केंद्र की भाजपा सरकार ने तीन महीने में भी मजदूरों की वापसी के लिये कोई नीति नही बनाई। भौगोलिक रूप से छत्तीसगढ़ 6 राज्यों से जुड़े होने के कारण यहां से बड़ी संख्या में मजदूर पैदल गुजर रहे हैं। कांग्रेस पार्टी, समाजसेवी संगठन तथा राज्य सरकार उनकी मदद कर रही है वहीं भाजपा नेता व कार्यकर्ता मदद के लिए सामने नहीं आए।

छत्तीसगढ़ अकेला ऐसा राज्य है जहाँ दूसरे राज्यों से पैदल चलकर जो श्रमिक पहुंचे उनके खाने पीने से लेकर सीमा तक छोड़ने की व्यवस्था की जा रही है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल स्वयं संवेदनशीलतापूर्वक मजदूरों की परेशानी दूर करने में लगे हैं। राज्य से बाहर फंसे छत्तीसगढ़ के मजदूरों को वापस लाने राज्य सरकार ने 45 ट्रेनों को चलवाने की स्वीकृति ले ली है। अभी तक 15 ट्रेनों के माध्यम से 22 हजार श्रमिकों की राज्य में वापसी हो चुकी है। दूसरे चरण में 34,000 श्रमिकों की वापसी के लिए 2 करोड़ का भुगतान राज्य की कांग्रेस सरकार ने रेलवे को कर दिया है। कुल ढाई लाख श्रमिकों को वापस लाने की योजना है। यही नहीं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर दूसरे राज्य के 30,000 हजार श्रमिकों को उनके गृह राज्य पहुंचाया गया है।

शुक्ला ने कहा

शुक्ला ने कहा कि डॉ. रमन सिंह भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं।यदि वास्तव में वे देश भर में भटक रहे मजदूरों का भला चाहते तो केंद्र पर मजदूरों को वापस लाने रेल सेवा बहाल करने दबाव डालते। मजदूरों को वापस लाने रेल शुरू करने के लिए राज्यों की सहमति की क्या जरूरत है ? रेलवे की ट्रेनें खाली खड़ी हैं। ड्राइवर और अन्य कर्मचारियों को वैसे भी रेलवे को तनख्वाह देना ही है फिर मजदूरों को वापस लाने ट्रेन चलाने में मोदी सरकार को क्या परेशानी है ? शुक्ला ने कहा कि भाजपा का चरित्र मजदूर व गरीब विरोधी है।

भाजपा की राज्य सरकारें अपने राज्यों में मजदूरों के प्रवेश में परेशानियां पैदा कर रही हैं । कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी द्वारा मजदूरों की दिल्ली से वापसी के लिए 1000 बसों को भेजने प्रस्ताव जो रखा उस पर उत्तरप्रदेश की योगी सरकार ने टालमटोल का रवैय्या अपनाया है। कर्नाटक व गुजरात की भाजपा सरकारें मजदूरों की वापसी की अनुमति में सहयोग नहीं कर रही हैं।

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