अगर पीपीएफ से ज्यादा रिटर्न पाना है तो वॉलेंटरी प्रोविडेंट फंड है बेहतर विकल्प

वॉलेंटरी प्रोविडेंट फंड में निवेश करने के लिए अकाउंट खोलना जरूरी नहीं

नई दिल्ली: अगर आप जॉब करते हैं और पीपीएफ से ज्यादा रिटर्न चाहते हैं तो आपके लिए वॉलेंटरी प्रोविडेंट फंड (VPF) बेहतर विकल्प हो सकता है. इसमें पीपीएफ से ज्यादा ब्याज मिलता है और पीपीएफ से 9 महीने पहले आपका पैसा दोगुना हो जाता है. ऐसे में आप सोच रहे होंगे कि आखिर वीपीएफ है क्या और इसमें किस तरह निवेश किया जा सकता है.

ऐसे करें वीपीएफ में निवेश

वॉलेंटरी प्रोविडेंट फंड (VPF) में निवेश करने के लिए आपको अलग से कोई अकाउंट खोलना जरूरी नहीं है. दरअसल यह कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की ही योजना है. इस योजना में इनवेस्ट करने वाले कर्मचारी अपनी इच्छा वेतन का कोई भी हिस्सा पीएफ खाते में जमा कर सकते हैं. लेकिन यह राशि सरकार की तरफ से तय की गई 12 प्रतिशत पीएफ की अधिकतम सीमा से ज्यादा होनी चाहिए.

रिस्क-फ्री और टैक्स फ्री इनवेस्टमेंट का ऑप्शन

पीपीएफ की तरह वीपीएफ भी रिस्क-फ्री और टैक्स फ्री इनवेस्टमेंट का ऑप्शन है. अगर आप अपना रिटायरमेंट प्लान कर रहे हैं तो वीपीएफ आपके लिए एक बेहतर ऑप्शन हो सकता है. पीपीएफ में निवेश की सीमा सालाना 1.5 लाख रुपये तक होती है, जबकि वीपीएफ में ऐसी कोई लिमिट नहीं होती. इसमें निवेश करने के लिए अलग से किसी भी खाते की जरूरत नहीं है. कोई भी कर्मचारी मूल वेतन और डीए का 100 प्रतिशत योगदान वीपीएफ में कर सकता है.

वीपीएफ पर ब्याज दर ईपीएफ के बराबर

वीपीएफ पर ब्याज दर ईपीएफ के बराबर ही मिलती है. फरवरी में सरकार की तरफ से ईपीएफ की ब्याज दर में 10 पैसे का इजाफा किया गया था. इस समय ईपीएफ के साथ ही वीपीएफ पर ब्याज दर बढ़कर 8.65 प्रतिशत है. क्योंकि वीपीएफ की राशि ईपीएफ अकाउंट में ही जमा होती है, इस कारण दोनों की ब्याज दर भी एक समान रहती है. दूसरी तरफ मौजूदा समय में पीपीएफ पर 8 प्रतिशत की ब्याज दर है.

आजकल निजी कंपनियों ने वीपीएफ की ऑनलाइन सर्विस देना शुरू दिया है. इससे आप अपना निवेश जरूरत के अनुसार घटा या बढ़ा सकते हैं. इतना ही नहीं आप इसे अपनी मर्जी के अनुसार बंद भी करा सकते हैं. लेकिन इसमें पैसा लॉक हो जाता है और उसे आप अपने रिटायरमेंट या नौकरी छोड़ने पर ही निकाल सकते हैं.

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