अगर वैक्सीन नहीं है तो क्या खुद को फांसी पर लटका लें : सनानंद गौड़ा

वैक्सीन की कमी को लेकर सवाल पूछा गया तो उनकी तरफ से तल्ख जवाब सुनने को मिला

नई दिल्ली:केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री सनानंद गौड़ा ने देश में जारी टीकाकरण अभियान पर विस्तार से बात की. उन्होंने सरकार का रोडमैप भी समझाया और आगे की रणनीति पर भी रोशनी डाली. केंद्रीय मंत्री से जब वैक्सीन की कमी को लेकर सवाल पूछा गया तो उनकी तरफ से तल्ख जवाब सुनने को मिला.

उन्होंने कहा कि कोर्ट ने तो अच्छी नीयत के तौर पर कहा है कि देश में सभी को जल्द कोरोना का टीका लग जाना चाहिए. मैं आपसे पूछता हूं अगर कोर्ट हमसे से बोले कि हमे इतनी वैक्सीन देनी है और हम उतनी नहीं दे पाए, तो क्या सरकार के लोग खुद को फांसी पर लटका लें.

मंत्री ने माना, टीकाकरण अभियान में खामियां

वैक्सीन की कमी पर केंद्रीय मंत्री की तरफ से इस बात पर भी जोर दिया गया कि सरकार के फैसले कभी भी राजनीति को ध्यान में रखते हुए नहीं लिए जाते हैं. उनकी माने तो सरकार ने अपनी तरफ से पूरी ईमानदारी और सच्ची निष्ठा के साथ काम किया है. उन्हें इस बात का भी अहसास है कि टीकाकरण अभियान में कुछ कमियां हैं जिन्हें वे जल्द दूर करने की बात कर रहे हैं.

गौड़ा की तरफ से भी कहा गया है कि कुछ चीजें सरकार के भी नियंत्रण से परे होती हैं. हम उन्हें मैनेज नहीं कर सकते हैं. गौड़ा ने विश्वास जताया है कि कुछ दिनों बाद टीकाकरण का अभियान और तेज हो जाएगा और जल्द सभी को टीका भी लगेगा.

बीजेपी नेता ने की नीतियों की तारीफ

वैसे केंद्रीय मंत्री के इन जवाबों के बाद भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव सीटी रवि ने सरकार की नीतियों की जमकर तारीफ की. उन्होंने जोर देकर कहा कि कोरोना से देश में हालात काफी खराब हो जाते अगर समय रहते कुछ जरूरी इंतजाम नहीं किए जाते. उन्होंने बोला है कि अगर तमाम इंतजाम पहले से नहीं करते तो इस देश में दस गुना या कह लीजिए 100 गुना ज्यादा लोगों को अपनी जान गवानी पड़ती.

ऑक्सीजन की किल्लत पर उनकी तरफ से कहा गया है कि सरकार ने सप्लाई 300 मीट्रिक टन से 1500 मीट्रिक टन कर दी है. वैसे उनकी तरफ से इस बात को जरूर स्वीकार किया गया है कि कोरोना के मामले बहुत तेजी से बढ़े जिस वजह से सरकार द्वारा किए गए इंतजाम भी कम पड़ लिए.

कोविड की तैयारियों को लेकर केंद्र को कई मौकों पर कोर्ट से भी फटकार पड़ी है. इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सीटी रवि ने कहा है कि जज को सब कुछ नहीं पता होता है. हमे तकनीकी सलाहकार समिति जो सलाह देती है, उस आधार पर फैसले लिए जाते हैं. उन्हीं की रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए कदम उठाए जाते हैं.

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