मध्यप्रदेश

मध्य प्रदेश में हिंदू देवी-देवताओं पर फेसबुक पोस्ट करते हैं, तो बड़ी मुश्किल में पड़ सकते हैं

मध्य प्रदेश में हिंदू देवी-देवताओं पर फेसबुक पोस्ट करते हैं, तो बड़ी मुश्किल में पड़ सकते हैं

बीजेपी शासित मध्य प्रदेश में अगर आप हिंदू देवी-देवताओं पर सवाल उठाने वाली फेसबुक पोस्ट करते हैं, तो आप बड़ी मुश्किल में पड़ सकते हैं. आपका ट्रोलिंग से गाली-गलौच का शिकार होना तय है. आपके खिलाफ एफआईआर हो सकती है. पुलिस कार्रवाई कर सकती है.

हाल ही में दो ऐसे केस हुए हैं, जिन से साफ है कि किस तरह ट्रोल के हमले के बाद मध्य प्रदेश की पुलिस हरकत में आ जाती है. खास तौर से तब जब हिंदुत्व ट्रोल ब्रिगेड किसी पर हमला बोलती है.
हाल ही में मध्य प्रदेश के खरगौन जिले में दो दलित युवकों पर पुलिस ने केस दर्ज किया. मामला उनकी फेसबुक पोस्ट से जुड़ा हुआ है. मध्य प्रदेश में फेसबुक पोस्ट को लेकर दर्ज हुआ ये पहला पुलिस केस है.

दोनों युवकों ने फेसबुक पर दीवाली मनाए जाने को लेकर कुछ सवाल उठाए थे. न तो उनकी भाषा आपत्तिजनक थी. न ही उन्होंने किसी भी देवी-देवता के बारे में अपमानजनक बातें लिखी थीं.
अब दोनों दलित युवक डर के साये में जी रहे हैं. उनके सिर पर गिरफ्तारी का खतरा मंडरा रहा है.

क्या लिखा था युवकों ने
खरगौन के मैनगांव के रहने वाले रीतेश माहेश्वरी ने फेसबुक पेज पर हिंदी में लिखा था: लोग अयोध्या में राम की वापसी का जश्न मनाने के लिए दिवाली मनाते हैं. इसमें सरस्वती, लक्ष्मी, गणेश और कुबेर का क्या रोल है? दिवाली पर इनकी भी पूजा होती है. दिवाली पर तो राम की पूजा होनी चाहिए.
24 बरस के रीतेश ने भीमपुत्र रीतेश के नाम से अपनी फेसबुक आईडी बनाई है. वो मैनगांव के गवर्नमेंट कॉलेज में अंग्रेजी साहित्य से पोस्ट ग्रेजुएशन कर रहा है.

इसी तरह खंडवा जिले के रहने वाले ओजस निहाले ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा था: लक्ष्मी और कुबेर की पूजा करने के बावजूद हंगर इंडेक्स में भारत 100वें नंबर पर क्यों है?
22 साल का ओजस भीकनगांव का रहने वाला है. वो जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई कर रहा है.

ओजस और रीतेश की फेसबुक पोस्ट पर खुलकर चर्चा करने के बजाय लोग उन्हें गलत ठहराने में जुट गए. गाली-गलौच शुरू हो गई. ट्रोल उन्हें निशाना बनाने लगे. उनके दबाव में पुलिस ने रीतेश और ओजस के खिलाफ केस दर्ज कर लिया.
सिर्फ सवालों के जवाब चाहते थे ये

बातचीत में ओजस और रीतेश दोनों ने कहा कि उनका इरादा कभी भी किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का नहीं था. वो तो बस अपने जहन में आए सवालों के जवाब चाहते थे.
दलितों की बलाई जाति से ताल्लुक रखने वाले रीतेश ने कहा कि, ‘मैं खुद हिंदू हूं. हिंदू देवी-देवताओं की पूजा करता हूं. लेकिन मेरे मन में सवाल था कि दिवाली पर राम की पूजा क्यों नहीं होती, जबकि दिवाली उनकी अयोध्या वापसी की याद में ही मनाई जाती है. मेरा किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का इरादा नहीं था. न ही मैं हिंदू धर्म पर सवाल उठा रहा था.

मैंने तो फेसबुक पर माफी भी मांगी. क्योंकि लोग मुझे गालियां दे रहे थे. शायद पुलिस ने राजनीतिक दबाव के चलते मेरे खिलाफ केस दर्ज किया क्योंकि शुरुआत में उन्होंने केस दर्ज करने से मना कर दिया था.’

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