छत्तीसगढ़

IIM रायपुर ने लीडरशिप शिखर सम्मेलन 2017 का आयोजन किया

रायपुर : आईआईएम रायपुर ने अपने प्रमुख उद्योग सहभागिता कार्यक्रम के पहले दिन, 23 सितंबर, 2017 को “लीडरशिप शिखर सम्मेलन 2017” का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का आयोजन ‘नेतृत्व और सामाजिक-आर्थिक समृद्धि’ विषय पर किया जा रहा है जिसमें  प्रमुख उद्योग जगत के 23 दिग्गजों ने दो दिनों की अवधि के दौरान अपने अनुभव और ज्ञान को साझा किया। इसका उद्देश्य उद्योग जगत के विशेषज्ञों को उनके परिप्रेक्ष्य और अनुभवों को साझा करने के लिए एक मंच प्रदान करना है जो छात्रों को प्रवीण तरीके से भविष्य की चुनौतियों से निपटने में मदद करेंगे।

शिखर सम्मेलन की शुरूआत डॉ. सत्यसिबा दास, अध्यक्ष, कॉर्पोरेट रिलेशंस, आईआईएम रायपुर द्वारा परिचय के साथ हुई जहां उन्होंने शिखर सम्मेलन के लिए अपनी दृष्टि व्यक्त की और बताया कि यह किस तरह छात्रों को ज्ञानवान और अनुभवी पेशेवरों द्वारा उद्योग जगत की उम्मीदों की जानकारी प्रदान करने के अपने लक्षय् को पूरा करेगा। उन्होंने एक अन्य उद्देश्य का उल्लेख भी किया, जो कि छात्रों के बीच उद्योग संचालन और उसकी गतिशीलता के बारे में जागरूकता पैदा करना था। इसके बाद गणमान्य व्यक्तियों द्वारा दीप प्रज्वलन और छात्रों द्वारा सरस्वती वंदना की गई।

फिर डॉ. भारत भास्कर, आईआईएम रायपुर के निदेशक ने, गणमान्य व्यक्तियों के लिए एक स्वागत भाषण दिया। उन्होंने बताया कि आईआईएम रायपुर ने नेतृत्व कैसे विकसित किया है जो सामाजिक-आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा देता है। आईआईएम रायपुर ने हाल ही में एक्जीक्यूटिव्स  के लिए जनरल मैनेजमेंट प्रोग्राम (जीएमपीई) शुरू किया जिसके माध्यम से वरिष्ठ और मध्य स्तर के प्रबंधकों को सर्वश्रेष्ठ नेतृत्व प्रथाओं के साथ सशक्त बनाने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, ‘जीएमपीई विशेष रूप से उन प्रबंधकों के लिए तैयार किया गया है जो एक समय में कॉर्पोरेट सीढ़ी के एक से अधिक कदम चढ़ना चाहते हैं। नौ महीनों में फैला, चार नौ दिवसीय मॉड्यूल का यह पाठ्यक्रम प्रबंधकों को एक समग्र प्रबंधकीय परिप्रेक्ष्य देने के लिए बनाया गया है। पाठ्यक्रम संरचना से शैक्षणिक उपकरण तक, सब कुछ न्यूनतम समय में अधिकतम सीखने के लिए अनुकूलित किया गया है।’

इस कार्यक्रम मुख्य अतिथि डॉ. ए.के. दुबे, प्रिंसिपल, जीईसी रायपुर द्वारा के एक संबोधन के साथ जारी रहा जिन्होंने रचनात्मकता, जिज्ञासा और जुनून के महत्व पर जोर दिया।

कार्यक्रम ने ने श्री आनंद बागड़ी, प्रमुख – घरेलू बाजार आरबीएल बैंक, द्वारा ‘भारतीय वित्तीय बाजार की वैश्विक प्रतिस्पर्धा’ विषय पर व्याख्यान के साथ गति पकड़ी। श्री बागड़ी ने संपत्ति के दायित्व प्रबंधन और तरलता प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने एक दिलचस्प जानकारी दी कि कैसे नकदीकरण के कारण तरलता में वृद्धि हुई है और अगले कुछ वर्षों में वृद्धि हासिल करने के लिए भारत को जो तरीका अपनाना चाहिए, उस पर भी उन्होंने अपनी राय दी।

डॉ. राजीव रॉय, सीईओ, 36इंक, छत्तीसगढ़ सरकार ने ‘उद्यमी पारिस्थितिकी तंत्र और सामाजिक आर्थिक समृद्धि’ पर एक व्याख्यान के साथ शिखर सम्मेलन जारी रखा। उन्होंने इसे एक सृजन और अवसरों की खोज के रूप में वर्णन करके उद्यमशीलता को फिर से परिभाषित किया। उन्होंने प्रतिस्पर्धी माहौल में जीवित रहने के लिए स्टार्टअप द्वारा अपनाई जाने वाली रणनीतियों के बारे में भी बात की। उन्होंने छात्रों को एक ऐसे स्टार्टअप पारिस्थितिक तंत्र विकसित करने में योगदान देने के लिए कहा जहां स्वतंत्रता की सराहना की जाएगी।

उद्घाटन भाषणों के बाद पैनल चर्चाएं आयोजित की गई। पहली पैनल चर्चा में ‘भारतीय व्यवसायों की सफलता: परिप्रेक्ष्य और चुनौतियां’ विषय पर चर्चा की गई जो श्रीमान संजीव पराशर, प्रोफेसर मार्केटिंग, आईआईएम रायपुर द्वारा संचालित की गई थी।

देव अरोड़ा, प्रमुख -तत्काल खपत, कोका कोला ने उल्लेख किया है कि प्रतियोगिता के दिन चले गए हैं और वर्तमान युग सहयोग पर केंद्रित है। उन्होंने यह भी निर्दिष्ट किया कि अनुकूलन क्षमता आज की दुनिया में सफलता की कुंजी है।

दिनेश टंडन, डीजीएम सेल्स, एलटी फूड्स ने इस बात पर प्रकाश डाला गया कि बहुत सारे संगठन चुनौतियों का सामना कर रहे हैं जो सही कीमत पर सही प्रतिभा हासिल करना है। उन्होंने यह भी बताया कि कैसे विमुद्रीकरण और जीएसटी ने अर्थव्यवस्था के पुनर्गठन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और उम्मीद है कि अगले दो-तीन महीनों में आर्थिक पुनरावृत्ति होगी।

गुरसिराम सिंह, हेड डेटा बिजनेस, एयरटेल, भारत ने सफलता के बारे में बात की और इसे सार्थक प्रभाव डालने की क्षमता के रूप में वर्णित किया। उन्होंने कहा ‘जरूरत के अंतर को समझना और क्या लोगों के जीवन को समृद्ध करता है को जानना महत्वपूर्ण है’।

विषय पर दूसरी पैनल चर्चा ‘नए प्रबंधकों के प्रारंभिक वर्ष’ अरीसेंट के उपाध्यक्ष श्री अजय गोयल द्वारा संचालित की गई।

डी वी शास्त्री, कार्यकारी निदेशक – एचआरडी, गेल (भारत) ने दार्शनिक दृश्टि से कहा, “हर कोई एक मानव संसाधन से संबद्ध है क्योंकि; अपने क्षेत्र के बावजूद, मनुष्य के साथ बातचीत अनिवार्य है ‘। उन्होंने छात्रों को अपनी विफलताओं से सीखने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने विश्वास पर बल दिया कि ज्ञान की अनन्तता की खोज सफलता की कुंजी है। सहानुभूति रखने पर महत्व पर ध्यान केंद्रित करते हए, उन्होंने कहा कि वह हमारे देश के भविष्य के नेताओं को काम से नेतृत्व करने की इच्छा रखना चाहिए, प्रभुत्व से नहीं।

जहांगीर आर. दमकेवाल, उपाध्यक्ष, सेवानिवृत्ति लाभ, डाराशॉ ने दो पहलुओं पर बात की; फ्रंट एंड बैक एंड फिटमेन्ट्स। उन्होंने छात्रों को प्रोत्साहित किया कि जब प्रबंधन में हों तो अभिनवता का उपयोग करें और जब पीछे हों तो रक्षात्मक रणनीति का उपयोग करें।

रेलिगेयर एंटरप्राइजेज लिमिटेड के निदेशक सुभ्रांग्शु निओगी चाहते हैं कि प्रबंधकों को अनुकूलनीय होना चाहिए और एक जिज्ञासु दृष्टिकोण के महत्व को समझना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से सवाल पूछने और उनको किसी भी तरह की समस्या की स्थिति में मदद मांगने की सलाह दी।

कार्य़क्रम 24 सितंबर, 2017 तक जारी रहेगा। कई अन्य सम्मानित उद्योग जगत के अग्रज मंच पर अपने विचारों और व्यापारिक दुनिया की अंतर्दृष्टि साझा करेंगे। छात्र इन सीखों को अपने कौशल में आत्मसात करने के लिए तत्पर रहेंगे और उद्योग में आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए खुद को बेहतर बनाएंगे।

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