राजस्व और खनिज विभाग की अनदेखी, संचालित हो रहे अवैध ईट भट्‌ठे

हितेश दीक्षित:

छुरा: राजस्व और खनिज विभाग की लापरवाही के चलते छुरा क्षेत्र के ग्राम खरखरा, पंडरीपानी में अवैध ईंट भट्ठा के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने से अवैध ईट भट्‌ठों की संख्या बढ़ती जा रही है.

अवैध ईंट भट्‌ठों पर राजस्व व खनिज विभाग की नजर नहीं है या यहां भी कह सकते है कि विभाग कुम्भकर्णी निद्रा में लीन है, छुरा क्षेत्र में मानक विहीन ईट भट्‌ठे चल रहे हैं। क्षेत्र में कार्यवाही नही होने से अनगिनत ईट भट्‌ठे चल रहे हैं।

इससे पर्यावरण तो प्रदूषित हो ही रहा है। साथ ही राजस्व को होने वाले आय का भी नुकसान हो रहा है।किसी अन्य विभाग की तो बात छोड़िए खनिज विभाग ने भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

इससे ईंट भट्‌ठा संचालकों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं ये लोग बड़े पैमाने पर ईट का निर्माण कर शासकीय व निजी जमीन के खनन करने में लगे हुए हैं। जबकि आबादी, वनक्षेत्र निस्तार स्थल, पाठशाला, सड़क, शासकीय भवन से तय दूरी पर ईट भट्ठा संचालित करना है।

खनिज विभाग के अधिकारियों द्वारा प्रकरण तैयार कर कार्रवाई न करना शासकीय आर्थिक क्षति को दर्शाता है। अवैध ईंट भट्ठों के चलते खरखरा और पंडरीपानी का राजस्व क्षेत्र और वन क्षेत्र की लकड़ी वनों की अबैध कटाई कर ईंट पकाई जाती है।जिसका राजस्व और खनिज विभाग कुम्भकर्णी निद्रा में लीन है।

नियमों का भट्ठा बैठा रहे ईंट-भट्ठा वाले

वायु को प्रदूषित करने और जमीन की उर्वरा शक्ति को कम करने में ईंट भट्ठे महती भूमिका निभा रहे हैं। भट्ठा प्रदूषण न फैलाए, इसके लिए इनके संचालन का नियम काफी सख्त रखा गया है।

छुरा क्षेत्र में इस समय सभी भट्टे अबैध तरीके से संचालित किए जा रहे है जबकि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने बगैर पर्यावरण सर्टिफिकेट के ईंट-भट्ठों के संचालन पर रोक लगा रखी है। सख्ती के बावजूद ईंट-भट्ठा संचालक न पर्यावरण की चिन्ता कर रहे हैं और न ही सामाजिक सरोकार का निर्वहन किया जा रहा है।

ईंट-भट्ठा चलाने के नियम

आबादी से 200 मीटर दूर होना चाहिए भट्ठा

मिट्टी खनन के लिए खनन विभाग की अनुमति जरूरीपर्यावरण लाइसेंस व प्रदूषण विभाग से एनओसी जारी होनी चाहिए

ईंट-भट्ठा चलाने के लिए जिला पंचायत, प्रदूषण विभाग और पर्यावरण विभाग की अनुमति लेना जरूरी

तय है प्रदूषण का मानक

एक ईंट-भट्ठे से सामान्यत: 750 एसएमपी तक प्रदूषण होता है। इसको कम करने की कवायद जारी है। नई टेक्नोलॉजी से प्रदूषण को कम करने का प्रयास किया जा रहा है। लगातार बढ़ रहे प्रदूषण को कम करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एनसीआर में स्थित सभी ईंट-भट्ठों को नई टेक्नोलॉजी से हाई ड्राफ्ट बनाने के निर्देश दिए थे।

इनमें कोयले से पका कर ईंट बनाई जाती हैं, जिससे सफेद धुआं आसमान में जाएगा और हाई ड्राफ्ट फैन कोयले की राख बनाएगा। इस विधि से भट्ठा लगाने से हवा में केवल 250 एसएमपी तक प्रदूषण रह जाएगा।

इस संबंध में तहसीलदार एन पी पटेल से चर्चा करने पर उन्होंने कहा कि देखवा लेती हूँ अभी ट्रेनिंग में हूँ पटवारी को बोल कर रिपोर्ट मंगवा लेती हूं।एक मौका तो सभी को देना पड़ेगा।

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