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सॉलिड ट्रैक पर है भारत की अर्थव्यवस्था, नोटबंदी-GST का दिखेगा अच्छा असर: IMF चीफ

इंटनेशनल मॉनेटरी फंड की एमडी क्रिस्टीन लगार्डे का मानना है कि भारत की इकोनॉमी काफी मजबूत ट्रैक पर है और भविष्य में नोटबंदी और जीएसटी का अच्छा प्रभाव देखने को मिलेगा। हालांकि आईएमएफ ने भारत की ग्रोथ के अनुमान को घटा दिया था।

लगार्डे का मानना है कि भारत में ऐसे काफी मजबूत रिफॉर्मं हो रहे हैं, जिनका नतीजा मीडियम और लांग टर्म में देखने को मिलेगा। पहले नोटबंदी और फिर बाद में जीएसटी के लागू करने के बाद यह देखना आश्चर्यजनक नहीं था कि इकोनॉमी की रफ्तार सुस्त पड़ी है, लेकिन लंबे समय में इसका अच्छा फायदा देखने को मिलेगा।

भारत की इकोनॉमी भविष्य में इन तीन कारणों से काफी तेजी से आगे बढ़ेगी। ये तीन कारण हैं महंगाई दर में गिरावट, फिस्कल डेफिसिट में कमी और रिफॉर्म का लागू होना। इनके चलते नई नौकरियां भी खूब आएंगी, जिसकी आशा देश का हर नौजवान कर रहा है।

आईएमएफ ने अपनी ताजा वैश्विक आर्थिक परिदृश्य रिपोर्ट में कहा है कि भारत में नोटबंदी के कारण आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती आई, जबकि जुलाई में देश भर में लागू किए गए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के कारण अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता का माहौल पैदा हुआ।

सरकारी खर्च में बढ़ोतरी और आर्थिक विकास दर की गणना के लिए आधार वर्ष में तब्दीली के कारण 2016 में उसकी विकास दर बढ़कर 7.1 फीसदी पर पहुंच गई, जो आईएमएफ के अप्रैल के अनुमान से 0.3 फीसदी ज्यादा था। इसी तरह, आधार वर्ष बदले जाने के कारण 2014 और 2015 की विकास दर में भी मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक की वार्षिक बैठक से पहले जारी इस रिपोर्ट में भले ही 2017 में विकास दर के मामले में चीन हमसे आगे निकलता दिख रहा है लेकिन 2018 में भारत फिर से दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था का दर्जा हासिल कर लेगा।

2018 में चीन की विकास दर 6.5 फीसदी रहने का अनुमान है जबकि भारत की विकास दर इस अवधि में 7.4 फीसदी रहने की संभावना है। इस रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2022 में भारत की विकास दर 8.2 फीसदी हो जाएगी।

इकोनॉमी के तीन मोर्चों पर बड़े सुधार जरूरी
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भारतीय अर्थव्यवस्था में बुनियादी बदलाव के लिए तीन मोर्चों पर काम करने की तस्वीर पेश की है। आईएमएफ ने कहा है कि भारत को श्रम कानूनों की संख्या घटानी चाहिए। इन्फ्रास्ट्रक्चर मजबूत करना चाहिए और महिलाओं के लिए ज्यादा मौके पैदा करने चाहिए।

आईएमएफ में एशिया-प्रशांत विभाग के डिप्टी डायरेक्टर केनेथ कंग ने कहा कि एशिया में बेहतर आर्थिक विकास की संभावनाएं हैं और भारत के लिए अभी मुश्किल सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए बेहतरीन मौका है।

कंग ने कहा कि भारत को अपने कॉरपोरेट और बैंकिंग सेक्टर की कमजोरियां दूर करनी होंगी और एनपीए जैसी समस्याओं को निपटाने की दिशा में तेज कदम बढ़ाने होंगे। उसे सार्वजनिक बैंकों के लिए दोबारा पूंजी बफर तैयार करना होगा। साथ ही बैंकों के कर्ज उगाही मैकेनिज्म में नई जान फूंकनी होगी।

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क्रिस्टीन लगार्डे
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