समस्याओं को निपटाने में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण की महत्वपूर्ण भूमिका

सात हजार से अधिक विकास कार्यों को मिली स्वीकृति

रायपुर : प्रदेश के ग्रामीण विकास की प्रक्रिया में स्थानीय जनप्रतिनिधियों को प्रत्यक्ष रूप से जोड़ने, ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए क्षेत्रीय नेतृत्व की सलाह पर अल्पकालीन योजनाओं के निर्माण, स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप भारत सरकार की केन्द्रीय तथा केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं को छोड़कर छोटे-छोटे विकास कार्यों की स्वीकृति एवं क्रियान्वयन और ग्रामीण क्षेत्रों के क्षेत्रीय ढांचागत विकास के उद्देश्य से उक्त प्राधिकरण चलाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण का गठन विगत 2012 में किया गया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में समय-समय पर बैठक आयोजित कर प्राधिकरण द्वारा महत्वपूर्ण निर्णय लिया जाता है। बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार संबंधितों को विकास कार्यों को क्रियान्वित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाते हैं तथा आपसी सहमति पर कार्ययोजना को पूरा करने की अपेक्षा की जाती है। यह प्राधिकरण प्रदेश में स्थानीय बुनियादी आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्य पूरा करने के साथ समस्याओं का निराकरण कर रहा है अर्थात् प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में अधोसंरचना का ढांचागत विकास कार्य त्वरित व समयबद्ध तरीके से हो रहा है। प्राधिकरण गठित होने के बाद से अब तक लगभग 7 हजार एक सौ से अधिक विकास कार्यों की स्वीकृति दी जा चुकी है।

प्राधिकरण की बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों में प्राधिकरण क्षेत्र के 46 उप-स्वास्थ्य केन्द्रों में मरीजों के ठहरने के लिए प्रतीक्षालय भवनों का निर्माण हो चुका है। इन उप-स्वास्थ्य केन्द्रों में प्रतीक्षालय के लिए 460 लाख रूपए मंजूर किए गए थे। प्राधिकरण क्षेत्र के 61 विकासखण्ड मुख्यालय में सरपंच सदन का निर्माण किया गया है। प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में रेडक्रॉस सोसायटी के माध्यम से जेनेरिक दवाओं का वितरण हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों की आय में बढ़ेातरी के लिए असाध्य पंपों के ऊर्जीकरण का निर्णय लिया गया था। तद्नुसार अब तक 23 करोड़ 46 लाख रूपए से चार हजार 851 कृषकों को सिंचाई पम्पों की स्वीकृति दी गई। निःशक्त, विधवा व परित्यक्त महिलाओं को आर्थिक रूप से सुदृढ़ व स्वावलंबी बनाने के लिए इनकी रूचि के अनुसार प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

आंगनबाड़ी केन्द्रों में ताजा व स्वादिष्ट भोजन तैयार करने की कार्ययोजना बनाकर उसे क्रियान्वित किया जा रहा है। प्राधिकरण के गठन से लेकर अब तक बुनियादी विकास के लिए 6134 विकास कार्यों के लिए 262.89 करोड़ रूपए की स्वीकृति दी गई। ग्रामीण क्षेत्रों में सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए 69 करोड़ 34 लाख रूपए की लागत से एक हजार 659 मंगल भवनों का निर्माण किया जा चुका है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन सुविधा के लिए 123 करोड़ 14 लाख रूपए के सी.सी. रोड निर्माण की स्वीकृति दी गई है। प्राधिकरण के मद से 420 पंचायत भवनों के लिए 748.04 लाख रूपए की स्वीकृति दी गई है।

प्राधिकरण की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार किसानों की समृद्धि के लिए कृषि पम्पों का ऊर्जीकरण हो रहा है। अब तक चार हजार 983 किसानों के ऊर्जीकरण के लिए 2401.15 लाख रूपए की स्वीकृति दी गई। निःशक्त, विधवा और परित्यक्त महिलाओं को आर्थिक रूप से सुदृढ़ व स्वावलम्बी बनाने का कार्य हो रहा है। इन्हें इनके रूचि के अनुसार संबंधित व्यवसायों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिसके अंतर्गत बांस शिल्प, रेडी टू ईट (खाद्य सामग्री) निर्माण कार्य शामिल है।

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