कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के विकास में नाबार्ड की महत्वपूर्ण भूमिका: डॉ. रमन सिंह

मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ राज्य संगोष्ठी को सम्बोधित किया

रायपुर : मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा है कि कृषि और कृषि से संबंद्ध क्षेत्रों के विकास में राज्य सरकार के साथ-साथ राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) का महत्वपूर्ण योगदान है। राष्ट्रीय स्तर पर कृषि और संबंद्ध क्षेत्रों के विकास के लिए दी जा रही सहायता में लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा नाबार्ड का है। मुख्यमंत्री आज यहां नाबार्ड द्वारा आयोजित छत्तीसगढ़ राज्य ऋण संगोष्ठी को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने संगोष्ठी में वर्ष 2018-19 के लिए छत्तीसगढ़ स्टेट फोकस पेपर का विमोचन किया। इस वर्ष के लिए नाबार्ड ने छत्तीसगढ़ में कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों के विकास के लिए 29 हजार 245 करोड़ रूपए का ऋण देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

मुख्यमंत्री ने संगोष्ठी में कहा कि नाबार्ड द्वारा प्रकाशित इस रिपोर्ट कृषि क्षेत्र की समग्र जानकारी उपलब्ध हो जाती है। उन्होंने कहा कि कृषि हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। राज्य सरकार इसके लिए हर संभव प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्षों में छत्तीसगढ़ में धान, गेहूं, दलहन और तिलहन सहित, कृषि उपजों का उत्पादन बढ़ा है। छत्तीसगढ़ की कृषि विकास दर राष्ट्रीय कृषि विकास दर से 1.6 प्रतिशत अधिक है। इसके और अधिक बढ़ने की संभावनाएं विद्यमान है। राज्य सरकार के प्रयासों से उन्नत बीजों के उत्पादन में छत्तीसगढ़ आत्मनिर्भर बन गया है। राज्य सरकार ने कृषि उपज का लागत मूल्य कम करने के अनेक उपाय किए हैं। इनमें किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर कृषि ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। इस सुविधा से किसानों द्वारा लिए जा रहे कृषि ऋण की राशि 300 करोड़ रूपए से बढ़कर 3400 करोड़ रूपए हो गई है। किसानों को सिंचाई पम्पों के लिए 7500 यूनिट बिजली निःशुल्क दी जा रही है। छत्तीसगढ़ देश का अकेला राज्य है, जो अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के किसानों को सिंचाई के लिए निःशुल्क बिजली दे रहा है। प्रदेश में इन दोनों वर्गों की आबादी लगभग 44 प्रतिशत है। इसी क्रम में राज्य सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की व्यवस्था को पारदर्शी और किसानों के लिए सुविधाजनक बनाया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा – प्रधानमंत्री ने प्रति बूंद अधिक उपज का आव्हान भी किया है। राज्य सरकार द्वारा लक्ष्य भागीरथी योजना के अंतर्गत प्रदेश में पहले से विद्यमान सिंचाई क्षमता का पूर्ण उपयोग सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। इस योजना में हर वर्ष सिंचाई बांधों और सिंचाई नहरों की मरम्मत कराकर सिंचाई बांधों की क्षमता का पूर्ण उपयोग करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही साथ प्रदेश में ड्रिप और स्प्रिंकलर के माध्यम से सूक्ष्म सिंचाई को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि आधारित अर्थ व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए बस्तर और सरगुजा सहित पूरे प्रदेश में कृषि और इससे जुड़े व्यवसायों से संबंद्ध महिला स्व-सहायता समूहों, किसानों के समूहों को आर्थिक और तकनीकी सहयोग देकर मजबूत बनाने का प्रयास किया जा रहा है। दुग्ध उत्पादन, मुर्गी पालन, उद्यानिकी, फूलों की खेती और मशरूम उत्पादन की गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में मछली उत्पादन में काफी संभावनाएं है। वर्तमान में छत्तीसगढ़ देश का पांचवा सर्वाधिक मछली उत्पादन करने वाला राज्य है। छत्तीसगढ़ तालाबों का प्रदेश है। यहां इस क्षेत्र को विकसित करने की काफी संभावनाएं है। उन्होंने बस्तर क्षेत्र के मोचो बाड़ी नवाचार का उल्लेख भी किया। डॉ. सिंह ने कहा कि कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रों के लिए राज्य के बजट के साथ-साथ जिला खनिज न्याय संस्थान तथा अन्य मदों से राशि उपलब्ध करायी जा रही है। मुख्यमंत्री ने संगोष्ठी में उपस्थित राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, बैंक अधिकारियों, गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों से नाबार्ड द्वारा उपलब्ध करायी जा रही सहायता का अधिकतम सदुपयोग करने का आव्हान किया। संगोष्ठी में नाबार्ड क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर के मुख्य महाप्रबंधक श्री एन.पी. महापात्र ने स्टेट फोकस पेपर के प्रावधानों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। नाबार्ड के महाप्रबंधक श्री अवधेश कुमार, भारतीय रिजर्व बैंक क्षेत्रीय कार्यालय के प्रभारी अधिकारी श्री नीलभ झा, राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी के संयोजक श्री ब्रम्हसिंह, जल संसाधन विभाग के सचिव श्री सोनमणि बोरा, कृषि विभाग के सचिव श्री अनूप श्रीवास्तव, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह और अपैक्स बैंक के अध्यक्ष श्री अशोक बजाज संगोष्ठी में उपस्थित थे।

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