छत्तीसगढ़

खुले में शौच प्रथा को समाप्त कर लोगों के सामान्य जीवन स्तर में सुधार लायें : वर्मा

कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) प्रबंधन समिति की बैठक

नारायणपुर : कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा की अध्यक्षता में जिला स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत ठोस एवं तरल अपशिष्ट पदार्थो के प्रबंधन पर सर्व जिला स्तरीय प्रबंधन समिति की बैठक शनिवार 31 मार्च को हुई। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत एवं प्रबंधन समिति के सदस्य उपस्थित थे। कलेक्टर ने कहा कि स्वच्छता साफ-सफाई और खुले में शौच प्रथा समाप्त करने को बढ़ावा देकर ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के सामान्य जीवन स्तर में सुधार लाए। उन्होंने कहा कि 02 अक्टूबर 2019 तक स्वच्छ भारत का विजन प्राप्त करने हेतु ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता गति में तेजी के साथ काम करना होगा।

वर्मा ने कहा कि खुले में शौच मुक्त पर्यावरण के उद्देश्य से शौचालयों के उपयोग हेतु व्यवहारगत बदलाव के लिए समुदाय को प्रेरित एवं प्रोत्साहित करने को प्राथमिकता दी जाए। इसके साथ ही हाई उपलब्ध जनशक्ति, सूचना प्रौद्योगिकी एवं मीडिया का प्रभावी उपयोग स्वच्छता एवं साफ-सफाई के लाभों का संदेश देने के लिए किया जाए। यह आवश्यक है कि किफायती शौचालयों की प्रौद्योगिकी एवं लागत के संबंध में लाभार्थी को पूरी जानकारी उपलब्ध कराई जाए। लोगों को स्वच्छता एवं साफ-सफाई के उपयोग जैसे महत्वपूर्ण समय पर साबुन एवं पानी से हाथ धोना, मासिक धर्म संबंधी समुचित साफ-सफाई जैसे ग्रामीण स्वच्छता एवं साफ-सफाई के लिए जागरूक किया जाए।

कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा ने कहा कि भारत सरकार के दिशा-निर्देशो के अनुसार गाँव की खुले में शौच करने की स्थिति, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन परियोजनाओं के कार्यान्वयन के साथ-साथ, पारिवारिक, विद्यालय एवं आंगनबाड़ी शौचालय तथा समुदायिक स्वच्छता परिसरों के निर्माण एवं उपयोग की निगरानी करने के लिए सुदृढ़ निगरानी व्यवस्था कायम करनी होगी। उन्होंने आगे कहा कि निगरानी के अंतर्गत अन्य बातों के साथ-साथ, सामाजिक लेखा परीक्षा जैसे सुदृढ़ समुदाय नीततंत्र का उपयोग किया जाए। उन्होंने जागरूकता सृजन, व्यवहारगत बदलाव लाने तथा घरों, विद्यालयों, आंगनबाड़ियों, सामुदायिक एकजुटता वाले स्थानों तथा ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन गतिविधयों में स्वच्छता सुविधाओं के लिए मांग सृजन पर जोर दिया।

कलेक्टर वर्मा ने कहा कि अंतर- वैयक्तिक सम्प्रेषण, घर-घर जाकर संपर्क करना और अभिप्रेरित करना स्वच्छता संबंधी लक्ष्यों को हासिल करने के सर्वाधिक महत्वपूर्ण साधन है। भागदारीपूर्ण सामाजिक एकजूटता के साथ ग्राम स्तर पर संचार तंत्र को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से ग्राम स्तरीय प्रेरकों/स्वच्छतादूत/स्वच्छता सन्देशवाहक को कार्य पर रखने के लिए अगल से दिशा-निर्देश जारी किए।

इस कार्यनीति के हिस्से के रूप में स्वच्छता दूतों के अतिरिक्त, स्वयं सेवक, आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, विद्यालय शिक्षक एवं सीएसओ, एनजीओ, एसएचजी एवं अन्य संगठन आदि जैसे क्षेत्र कर्मियों को ग्राम पंचायत में व्यवहारगत बदलाव लेने के लिए कार्य में लगाया जा सकता है। कलेक्टर ने कहा कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में कम से कम एक व्यक्ति ऐसा होना चाहिए जिन्हें स्वच्छता संबंधी संचार के लिए जिम्मेदार बनाया जाता है। इस कार्यनीति के हिस्से के रूप में स्वच्छता दूतों के अतिरिक्त, भारत में निर्माण स्वयं सेवक, आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, विद्यालय शिक्षक एवं सीएसओ, एनजीओ, एसएचजी एवं अन्य संगठन आदि जैसे क्षेत्र कर्मियों को ग्राम पंचायत में व्यवहारगत बदलाव लेने के लिए कार्य में लगाया जा सकता है।

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