इमरान सरकार ने गिलगित-बाल्टिस्‍तान में 15 नवंबर को चुनाव कराने का किया ऐलान

पाकिस्‍तान के राष्‍ट्रपति ने विधानसभा चुनाव कराने के बिल को अपनी मंजूरी दी

इस्‍लामाबाद:पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने पाकिस्‍तान अधिकृत कश्‍मीर के गिलगित-बाल्टिस्‍तान में 15 नवंबर को चुनाव कराने का ऐलान कर दिया है। पाकिस्‍तान के राष्‍ट्रपति आरिफ अल्‍वी ने विधानसभा चुनाव कराने के बिल को अपनी मंजूरी दे दी।

पाकिस्‍तानी अखबार एक्‍सप्रेस ट्रिब्‍यून के मुताबिक गिलगित-बाल्टिस्‍तान में होने वाले इस विधानसभा चुनाव में तीन प्रमुख राजनीतिक दल इमरान की पीटीआई, नवाज शरीफ की पीएमल एन और बिलावल की पार्टी पाकिस्‍तानी पीपुल्‍स पार्टी हिस्‍सा लेगी।

गिलगित-बाल्टिस्‍तान विधानसभा में 33 सीटें होंगी और इसमें से तीन ट्रेक्‍नोक्रेट और 6 महिलाओं के लिए सुरक्षित होंगी। चुनाव केवल बची हुई 24 सीटों पर ही होंगे।

गिलगित-बाल्टिस्‍तान को प्रांत का दर्जा दिया

पाकिस्‍तान सरकार का दावा है कि इस चुनाव में सात लाख लोग मतदान करेंगे और इसमें से 45 प्रतिशत महिलाएं हैं। इससे पहले पाकिस्‍तान सरकार ने 17 सितंबर को गिलगित-बाल्टिस्‍तान को प्रांत का दर्जा दिया था।

सूत्रों के मुताबिक पाक सेना ने भारत के जम्‍मू-कश्‍मीर के विशेष राज्‍य के दर्जे को खत्‍म करने के बाद यह फैसला लिया है। पाकिस्‍तान को डर सता रहा है कि भारत पीओके पर कब्‍जा कर सकता है।

बताया जा रहा है कि पाकिस्‍तान के गिलगित प्‍लान के पीछे पाकिस्‍तानी सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा का हाथ है। पाकिस्‍तानी मीडिया के मुताबिक सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने गिलगित को लेकर पिछले दिनों देश की सभी बड़ी पार्टियों के नेताओं को सेना मुख्‍यालय रावलपिंडी में आयोजित दावत में बुलाया था।

इसमें नवाज शरीफ के भाई शाहबाज शरीफ, आस‍िफ अली जरदारी के बेटे बिलावल भुट्टो जरदारी समेत पाकिस्‍तानी सियासत के कई दिग्‍गज नेता शामिल हुए थे। इस दौरान आईएसआई के प्रमुख भी मौजूद थे।

सेना राजनीतिक मामलों में हस्‍तक्षेप कर रही: बिलावल

बाजवा ने गिलगित को प्रांत बनाए जाने के मुद्दे पर चर्चा की लेकिन उसी दौरान उनकी बिलावल भुट्टो और शाहबाज शरीफ से बहस हो गई। बाजवा ने कहा कि पीओके पर भारत की कार्रवाई का डर है और चीन इस इलाके में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है। ऐसे में हम गिलगित को एक नया प्रांत बनाना चाहते हैं।

पाकिस्‍तानी सेना प्रमुख चाहते थे कि गिलगित को प्रांत बनाने के लिए राजनीतिक दल उनका समर्थन करें। इसी दौरान बिलावल ने राजनीतिक मामले में सेना के हस्‍तक्षेप का मुद्दा उठा दिया। बिलावल भुट्टों ने कहा कि इसी तरह के हालात वर्ष 1971 में थे और उस समय भी सेना राजनीतिक मामलों में हस्‍तक्षेप कर रही थी।

उधर, नवाज शरीफ की बेटी मरियम नवाज शरीफ और पाकिस्तान मुस्लिम लीग (PMLN) की उपाध्यक्ष मरयम नवाज ने कहा है कि यह एक सरकारी मुद्दा है और इस पर फैसला संसद में होगा, न कि सेना मुख्यालय।

मरयम ने अपनी पार्टी के किसी नेता के इस बैठक में शामिल होने से इनकार किया है। उनका कहना है कि यह राजनीतिक मुद्दा है और इसे संसद में सुलझाना चाहिए, न कि सेना के मुख्यालय में। मरयम ने कहा है कि मुख्यालय को राजनीतिक नेताओं को ऐसे मुद्दों पर नहीं बुलाना चाहिए और न ही नेताओं को वहां जाना चाहिए।

भारत ने किया था विरोध

भारत ने मई में पाकिस्तान को दो-टूक कहा था कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में गिलगित-बल्टिस्तान समेत पूरा इलाका पाकिस्तान या उसकी न्यायपालिका के पास ऐसे क्षेत्रों में अधिकार नहीं हैं जो उसने जबरन अवैध तरीके से कब्जाए हैं।

भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में कोई बदलाव करने की कोशिश नहीं करने की चेतावनी दी थी और कहा था कि अवैध कब्जा फौरन छोड़ दे। भारत ने इन इलाकों में चुनाव नहीं कराने की चेतावनी भी दी थी।

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