अंबिकापुर जेल में आंत्रशोथ हुआ बेकाबू, 65 कैदी जिला अस्पताल में भर्ती, दो की मौत

जिला अस्पताल में भर्ती कई कैदियों की स्थिति नाजुक

भरत ठाकुर

अंबिकापुर। अंबिकापुर सेंट्रल जेल में आंत्रशोथ फैलने से 200 सौ से ज्यादा कैदी बीमार हो गए हैं। इनमें से 30 को जेल अस्पताल में और 65 को जिला अस्पताल में भरती कराया गया है। जिला अस्पताल में भर्ती कई कैदियों की स्थिति नाजुक बताई जा रही है। आंत्रशोथ से अभी तक दो कैदियों की मौत हो चुकी है। कल देर शाम जशपुर के गोपाल राम ने भी दम तोड़ दिया। गोपाल राम को कल सुबह तबीयत बिगड़ने पर अंबिकापुर के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शाम को उसकी मौत हो गई। इससे पहले 16 मई को कांसाबेल के पालन लोहार की आंत्रशोथ से मौत हो गई थी। आंत्रशोथ से मरने वाले दोनों आदिवासी कैदी हैं। लिहाजा, जेल महकमे में हड़कंप मच गई है। पता चला है, डीआईजी जेल डॉ. केके गुप्ता ने अंबिकापुर जेल सुपरिटेंडेंट को नोटिस जारी कर कारण पूछा है।

इस मामले में अंबिकापुर जेल प्रशासन और जिला स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही सामने आ रही है। एक हफ्ते से जेल में आंत्रशोथ फैला है। लेकिन, बचाव के उपाय नहीं किए गए। न तो कैंप लगाए गए और न ही संक्रमण से बचाने बीमार कैदियों को शिफ्थ किया गया। इससे हुआ यह कि आंत्रशोथ कैदियों को चपेट में लेता गया। बता दें कि अंबिकापुर जेल में करीब दो हजार कैदी हैं। इनमें से अभी तक दो सौ से अधिक कैदी आंत्रशोथ की चपेट में आ चुके हैं। इसके बाद भी जेल प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा रहा।

अंबिकापुर जिला अस्पताल के डाक्टरों ने बताया कि 70 कैदियों का एक लॉट डिस्चार्ज होकर जेल जा चुका है। 65 कैदी फिर भरती हुए हैं। इनमें से कुछ वो भी हैं, जो डिस्चार्ज होकर जेल लौट गए थे। याने फिर से आंत्रशोथ की चपेट में वे आ गए। इसका मतलब है कि जेल को इस संक्रमक बीमारी ने पूरी तरह चपेट में ले लिया है। एक सीनियर डाक्टर ने बताया कि समय रहते जेल प्रशासन अगर सजग नहीं हुआ तो स्थिति और भयावह हो सकती है।

डीआईजी जेल डा. केके गुप्ता से पूछा तो उन्होंने आंत्रशोथ की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि अंबिकापुर की कलेक्टर और सिविल सर्जन से उन्होंने आग्रह किया है कि जेल में हेल्थ कैंप लगाए जाए, साथ ही पानी की भी जांच कराई जाए। ताकि, आंत्रशोथ के पैर पसारने से रोका जा सके। उन्होंने जेल अधीक्षक से भी कहा है कि बीमार कैदियों को सामान्य वार्ड से अलग किया जाए। ताकि, आंत्रशोथ के संक्रमण का दीगर कैदी शिकार न हो सकें।

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