स्कूली बच्चों को ढो रहे एंबुलेंस वाहन में

मनेन्द्रगढ़।

अभी तक आप लोगों ने सुना होगा कि एंबुलेंस में घायल मरीजों को लाया ले जाया जाता है. लेकिन कोरिया जिले के एसईसीएल हसदेव क्षेत्र में एंबुलेंस का प्रयोग जिस काम के लिए किया जा रहा है, उसे जानकार आपको यकीन नहीं होगा। यहां एंबुलेंस का उपयोग बच्चों को स्कूल लाने ले जाने के लिये किया जा रहा है। मनेन्द्रगढ़ एवं इसके आसपास कोयले की कई खदानें संचालित हैं।

इन खदानों में काम करने वाले मजदूरों, अधिकारियां, मेडिकल स्टॉफ व अन्य कर्मचारियों के बच्चों को स्कूल पहुंचाने तथा वहां से लाने की जिम्मेदारी एसईसीएल हसदेव प्रबंधन की है। लेकिन इस जिम्मेदारी को हसदेव प्रबंधन कितनी लापरवाही से निभा रहा है वह काफी चौकाने वाला है।

जिस एंबुलेंस में गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीजों को लाया ले जाया जाता है जिसका उपयोग अस्पताल के कामों में होता है उस एंबुलेंस का उपयोग हसदेव प्रबंधन मासूम बच्चों को लाने ले जाने में कर रहा है। बीते कई वर्षों से यह सिलसिला जारी है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि यदि बच्चे इस एंबुलेंस में आने जाने की वजह से किसी गंभीर बीमारी की चपेट में आते हैं तो इसकी जवाबदारी किसकी होगी।

वहीं जब वाहन का पंजीयन एंबुलेंस के रूप में हुआ है तो उसका परिचालन स्कूल बस के रूप में कर हसदेव प्रबंधन खुलेआम कानून को चुनौती देता नजर आ रहा है।

हैरत वाली बात तो यह है कि यह सिलसिला बदस्तूर जारी है, उसके बाद भी इस ओर किसी का ध्यान न जाना, कई प्रकार के संदेहों को जन्म देता है। आखिर क्या वजह है कि भारत की मिनीरत्न कंपनी का दर्जा प्राप्त एसईसीएल इस गंभीर मसले की यूं अनदेखी कर रहा है।

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