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बसना-सरायपाली में भाजपा, कांग्रेस के आगे गठबंधन की चुनौती

प्रदीप शर्मा

सरायपाली विधानसभा क्षेत्र बसना विधानसभा क्षेत्र

सरायपाली में कांग्रेस के आगे

होगी भाजपा की चुनौती 

बसना में कांग्रेस की तैयारी

भाजपा को करनी होगी मशक्कत

रामलाल चौहानरूपकुमारी चौधरीछत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद महासमुंद जिले की अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित सरायपाली में अब तक दो बार भाजपा को जीत मिली है, वहीं साल 2008 के विधानसभा चुनाव में यहां से कांग्रेस ने जीत हासिल की थी। वर्तमान में यहां से भाजपा के रामलाल चौहान विधायक चुने गए हैं।
सामान्य वर्ग की सीट बसना में चुनावी नतीजे भी अदल-बदल वाले रहे हैं। इस सीट पर दो बार भाजपा तो एक बार कांग्रेस को जीत मिली है। वर्तमान में यहां से भाजपा की रूप कुमारी चौहान विधायक चुनी गई हैं।

रायपुर: साल 2003 के विधानसभा चुनाव में सरायपाली सामान्य सीट पर भाजपा ने डॉ. त्रिलोचन पटेल को अपना उम्मीदवार बनाया था। वहीं कांग्रेस ने राजपरिवार के देवेंद्र बहादुर सिंह को मैदान में उतारा था। इस चुनाव में भाजपा के डॉ. त्रिलोचन पटेल ने कांग्रेस के देवेंद्र बहादुर सिंह को सीधे मुकाबले में 8732 मतों से हराया। भाजपा के त्रिलोचन पटेल को 49674 मत मिले वहीं कांग्रेस के देवेंद्र बहादुर सिंह को 40942 मतों से संतोष करना पड़ा।

साल 2008 के विधानसभा चुनाव में सरायपाली सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित घोषित की गई। इस चुनाव में कांग्रेस ने डॉ. हरिदास भारद्वाज को मैदान में उतारा था। इस चुनाव में कांग्रेस की चाल कामयाब रही और भाजपा को एंटी इनकम्बेंसी फैक्टर की वजह से हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में सीधे मुकाबले में कांग्रेस के डॉ. हरिदास भारद्वाज ने भाजपा की नीरा चौहान को 16222 मतों से हराया। कांग्रेस के डॉ. हरिदास भारद्वाज को 64456 मत मिले वहीं भाजपा की नीरा चौहान को 48234 मतों से संतोष करना पड़ा।

साल 2013 के विधानसभा चुनाव में क्षेत्र के मतदाताओं ने फिर बदलाव करते हुए भाजपा को जीत दिलाई। इस चुनाव में भाजपा ने अपना उम्मीदवार बदलते हुए रामलाल चौहान को अपना उम्मीदवार बनाया था जो जीत कर विधानसभा में पहुंचने में कामयाब रहे। उन्होंने ने कांग्रेस के डॉ. हरिदास भारद्वाज को सीधे मुकाबले में 28332 के रिकार्ड मतों से हराया। एंटी इनकम्बेंसी की वजह से कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में भाजपा के रामलाल चौहान को 82064 मत मिले वहीं कांग्रेस के डॉ. हरिदास भारद्वाज को 53232 मतों से संतोष करना पड़ा।

कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा को एंटी इनकम्बेंसी फैक्टर का सामना करना पड़ सकता है। इस वजह से मतदाताओं की नाराजगी दूर करने के लिए भाजपा अपना उम्मीदवार बदल सकती है वहीं कांग्रेस के आगे भाजपा को हराने की चुनौती होगी। इस बार जोगी कांग्रेस व बसपा गठबंधन भी मैदान में है। जिसकी वजह से त्रिकोणीय मुकाबले के आसार हैं।
फिलहाल वो चेहरे कौन होंगे ये आने वाला वक्त तय करेगा।

बसना में कांग्रेस की तैयारी, भाजपा को करनी होगी मशक्कत

अविभाजित मध्यप्रदेश में बसना सामान्य सीट पर ज्यादातर सरायपाली राजपरिवार के महेंद्र बहादुर सिंह जीतकर विधानसभा में पहुंचते रहे हैं। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद साल 2003 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर भाजपा ने अपनी जीत का परचम लहराया। इस चुनाव में भाजपा ने डॉ. त्रिविक्रम भोई को मैदान में उतारा था, वहीं कांग्रेस की ओर से महेंद्र बहादुर सिंह मैदान में थे। इस चुनाव में भाजपा के डॉ. त्रिविक्रम भोई ने सीधे मुकाबले में कांग्रेस के महेंद्र बहादुर सिंह को 2403 मतों से हराया। भाजपा के डॉ. त्रिविक्रम भोई को 29385 मत मिले वहीं कांग्रेस के महेंद्र बहादुर सिंह को 26982 मतों से संतोष करना पड़ा।

साल 2008 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने इस सीट पर जीत हासिल कर भाजपा को हराया। इस बार कांग्रेस ने देवेंद्र बहादुर सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया वहीं भाजपा की ओर से प्रेमशंकर पटेल मैदान में थे। इस चुनाव में कांग्रेस के देवेंद्र बहादुर सिंह ने भाजपा के प्रेमशंकर पटेल को सीधे मुकाबले में 13907 मतों से हराया। कांग्रेस के देवेंद्र बहादुर को 52145 मत मिले वहीं भाजपा के प्रेमशंकर पटेल को 36238 मतों से संतोष करना पड़ा।

2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को इस सीट पर मतदाताओं ने नकार दिया और जीत भाजपा के खाते में रही। इस चुनाव में भाजपा ने अपना उम्मीदवार बदलते हुए वर्तमान संसदीय सचिव रूप कुमारी चौहान को मैदान में उतारा था। वहीं कांग्रेस की ओर से देवेंद्र बहादुर उम्मीदवार थे। जिन्हें मतदाताओं की नाराजगी का सामना करना पड़ा। इस चुनाव में भाजपा की रूप कुमारी चौहान ने कांग्रेस के देवेंद्र बहादुर सिंह को सीधे मुकाबले में 6239 मतों से हराया। भाजपा की रूप कुमारी चौहान को 77137 मत मिले वहीं कांग्रेस के देवेंद्र बहादुर सिंह को 70898 मतों से संतोष करना पड़ा।

उलट फेर नतीजों वाली बसना सामान्य सीट पर इस बार भाजपा के आगे अपनी जीत बचाने की चुनौती होगी तो कांग्रेस राजपरिवार के किसी चेहरे को मैदान में उतारने की तैयारी में है। वहीं जोगी कांग्रेस और बसपा गठबंधन के मैदान में होने से मुकाबला रोचक हो गया है। अबकी बार मतदाता किसे अपना विधायक चुनेंगे यह आने वाला वक्त तय करेगा।

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बसना-सरायपाली में भाजपा, कांग्रेस के आगे गठबंधन की चुनौती
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