कुपोषण के मामले में, भारत पूरे विश्व में नंबर-1

भारत से पाक भी उससे चार गुना पीछे, भारत में विश्व के एक तिहाई कुपोषित बच्चे

आज के समय में कुपोषण अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिये चिंता का विषय बन गया है। यहां तक की विश्व बैंक ने इसकी तुलना ब्लेक डेथ नामक महामारी से की है। जिसने 18 वीं सदीं में यूरोप की जनसंख्या के एक बड़े हिस्से को निगल लिया था।

विश्व में स्टंटिड (कुपोषण के कारण अविकसित रह जाने वाले) बच्चों में करीब 31 फीसदी हिस्सेदारी भारत की है। इस मामले में भारत पूरे विश्व में नंबर-1 पर है।

यहां तक कि बाल विकास में गड़बड़ी के मामले में भारत से पाकिस्तान भी उससे चार गुना पीछे है। यह दावा गुरूरवार को पेश की गई एक वैश्विक पोषण रिपोर्ट-2018 में किया गया है।

वैश्विक पोषण रिपोर्ट के अनुसार, भारत में विश्व के एक तिहाई कुपोषित बच्चे रहते हैं

इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट के अध्ययन पर आधारित इस रिपोर्ट में बताया गया है कि वैश्विक स्तर पर 5 साल से कम उम्र के 15.08 करोड़ बच्चे स्टंटिड और 5.05 करोड़ बच्चे वैस्टिड (वजन में उम्र के हिसाब से कमी) का शिकार हैं।

कुपोषण के कारण ओवरवेट होने की समस्या के शिकार 3.83 करोड़ बच्चों में 10 लाख से ज्यादा की संख्या रखने वाले दुनिया के 7 देशों में भी भारत शामिल है।

इस लिस्ट में अन्य देश अमेरिका, चीन, पाकिस्तान, मिस्र, ब्राजील और इंडोनेशिया हैं। दुनिया के 141 देशों में किए गए विश्लेषण पर आधारित रिपोर्ट के अनुसार, करीब 88 फीसदी यानि 124 देश कुपोषण की किसी न किसी एक स्थिति के अवश्य शिकार पाए गए हैं।

क्या हैं स्टंटिड व वैस्टिड

बता दें कि स्टंटिड या उम्र के हिसाब से कम लंबाई की समस्या लंबे समय तक पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व नहीं मिलने और लगातार इंफेक्शन का शिकार होने के कारण होती है, जबकि वैस्टिड या लंबाई के हिसाब से बेहद कम वजन की समस्या भुखमरी का पुख्ता संकेत मानी जाती है।

वैस्टिड को 5 साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्युदर का बड़ा कारण माना जाता है।

स्टंटिड बच्चों में टॉप-3

देश शिकार बच्चे

-भारत 4.66 करोड़
-नाइजीरिया 1.39 करोड़
-पाकिस्तान 1.07 करोड़

वैस्टिड बच्चों में टॉप-3

देश शिकार बच्चे
-भारत 2.55 करोड़
-नाइजीरिया 34 लाख
-इंडोनेशिया 33 लाख

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