फ्रांस में प्रदूषण से बिगड़ी सेहत तो मां- बेटी ने सरकार पर कर दिया केस

पेरिस : फ्रांस की अदालत में एक अनोखा मामला सामने आया है। यहां एक मां-बेटी ने प्रदूषण के कारण बिगड़ी सेहत को लेकर सरकार पर केस कर दिया है। दोनों ने पेरिस के पूर्व में स्थित मॉन्टि्रयल की प्रशासनिक अदालत में याचिका दायर कर सरकार से 1.60 लाख यूरो (करीब 1.25 करोड़ रुपये) का हर्जाना मांगा है।

सरकार पर लगा प्रदूषण से नहीं निपटने का आरोप
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सरकार प्रदूषण से निपटने की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठा सकी। विशेष तौर पर दिसंबर, 2016 में जब पेरिस भीषण प्रदूषण की चपेट में था, उस समय अधिकारियों ने पर्याप्त कदम नहीं उठाए। 52 वर्षीय मां और 16 वर्षीय बेटी का कहना है कि प्रदूषण के चलते उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ा।

घर के सामने की सड़क से गुजरती हैं 11 लाख गाड़ियां
मां-बेटी उत्तरी पेरिस के उपनगर सेंट ओवेन में रहते हैं, जो बेहद भीड़-भाड़ वाले रिंग रोड के नजदीक है। इस रिंग रोड को 1973 में बनाया गया था। इससे रोजाना 11 लाख गाडि़यां गुजरती हैं। यह यातायात आसपास रहने वाले करीब एक लाख लोगों के लिए किसी बुरे सपने जैसा ही है।

डॉक्‍टर ने दी शहर बदलने की सलाह
दोनों याचिकाकर्ताओं का कहना है कि प्रदूषण के कारण उन्हें सांस की बीमारी हो गई है। उनके वकील ने बताया कि डॉक्टरों की सलाह पर दोनों ऑर्लियांस शहर में रहने लगीं। तबसे उनकी सेहत में सुधार हुआ है। वकील का तर्क है कि फ्रांस की सरकार जनता को प्रदूषण से बचाने के लिए जरूरी कदम नहीं उठा पाई।

अन्य लोग भी कर सकते हैं केस
इस तरह के मामलों में मदद के लिए रेस्पायर के नाम से एनजीओ बनाने वाले सेबेस्टियन ने बताया कि पूरे फ्रांस में करीब 50 लोग सरकार के खिलाफ ऐसे कदम उठा रहे हैं। सेबेस्टियन ने अदालत तक मामला पहुंचने को ही अपनी जीत माना है। उन्होंने कहा, ‘आठ साल पहले जब मैंने रेस्पायर बनाया था, तब मेरा लक्ष्य केवल यही था कि बढ़ते प्रदूषण और लोगों की खराब सेहत के बीच संबंध को कानूनी दायरे में लाया जाए।’

गंभीर है प्रदूषण की स्थिति
फ्रांस की जनस्वास्थ्य एजेंसी के मुताबिक, वायु प्रदूषण के कारण यहां सालाना 48,000 लोगों की असमय मृत्यु हो जाती है। 2016 में पेरिस में प्रदूषण चरम पर था। उस समय सरकार ने गाड़ियों के लिए ऑड-इवन (सम-विषम) का नियम लागू किया था। एक दिन सम नंबर प्लेट वाली और दूसरे दिन विषम नंबर प्लेट वाली गाडि़यों को चलाने की अनुमति थी। इससे पहले प्रदूषण की गंभीरता के कारण 1997, 2014 और 2015 में भी इस तरह के कदम उठाने पड़े थे। प्रदूषण यहां राजनीतिक मुद्दा भी बन गया है।

यूरोपीय अदालत में भी चल रहा मामला
मई, 2018 में यूरोपीय आयोग ने फ्रांस और पांच अन्य देशों के खिलाफ यूरोपीय न्याय अदालत में मामला दर्ज कराया था। आयोग ने इन देशों पर हवा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में लंबी अवधि के कदम उठाने में विफल रहने का आरोप लगाया है। फ्रांस को हवा में नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड व अन्य सूक्ष्म कणों की अधिक मात्रा को लेकर इससे 12 साल पहले ही चेतावनी दी गई थी। यहां कुछ शहरों में ऐसे सूक्ष्म कणों की मात्रा यूरोपीय संघ (ईयू) के तय मानक के दोगुने से भी ज्यादा पाई गई थी।

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