जिले में 64 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बोनी पूरी

राजनांदगांव : राजनांदगांव जिले में पिछले दो-तीन दिनों में हुई बारिश से खेतों में पर्याप्त बतर आ गई है और कृषि विभाग के उप संचालक श्री अश्वनी बंजारा ने किसानों को अब खरीफ फसलों की बोनी तेज करने की सलाह दी है। जिले में अब तक 64 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में किसानों ने धान की बोनी पूरी कर ली है। कृषि विभाग ने अन्य किसानों को धान की बोनी के लिए इस मौसम और खेतों में बतर को उपयुक्त बताते हुए जल्द से जल्द बोनी पूरी करने का सुझाव दिया है। जिले में 3 हजार 715 हेक्टेयर क्षेत्र में सोयाबीन की बोनी भी अब तक पूरी कर ली गई है। अन्य खरीफ फसलों की बोनी राजनांदगांव जिले के सभी विकासखंडों में तेजी से जारी है।
जिले के उप संचालक कृषि श्री अश्वनी बंजारा ने आज भण्डारपुर-खार राजकट्टा क्षेत्र में अपने प्रवास के दौरान धान की बोनी कर रहे किसानों से चर्चा की। उन्होंने किसानों को धान की कतार बोनी करने और फसलों का बीमा अनिवार्यत: कराने की सलाह दी। उप संचालक कृषि ने भण्डारपुर में श्री राजेन्द्र चंद्रवंशी के खेत में चल रही धान की बोनी का अवलोकन किया। पूछने पर किसान श्री राजेन्द्र चंद्रवंशी ने बताया कि वे अपने घर का दो साल पहले का धान का एमटीयू 1010 किस्म का बीज खेत में बो रहे हैं। कृषि अधिकारी ने किसान श्री चंद्रवंशी को धान बीज को 17 प्रतिशत नमक के घोल से उपचारित कर और फफंूद नाशक दवा से उपचारित कर बोने की सलाह दी। उन्होंने किसान श्री चंद्रेश सिंह नेताम और श्री कृष्णा चंद्रवंशी को भी छिड़का बोनी के स्थान पर अपने खेतों में धान की कतार बोनी करने की सलाह दी। पूछने पर किसान श्री राजेन्द्र चंद्रवंशी ने बताया कि उन्होंने अभी तक सोसायटी से खेती के लिए लोन नहीं लिया है न ही अपनी फसल का बीमा कराया है। कृषि अधिकारी ने श्री चंद्रवंशी को तत्काल क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से संपर्क कर अऋणी किसान के रूप में फसल बीमा कराने की सलाह दी।
श्री बंजारा ने उपस्थित किसानों को बताया कि खेतों में धान की कतार बोनी के लिए कृषि अभियांत्रिकी शाखा द्वारा ट्रेक्टर भी उपलब्ध कराया जाता है। इसके लिए किसानों को 800 रूपए प्रति घंटा शुल्क जमा करना होता है। ट्रेक्टर से एक घंटे में लगभग एक से सवा एकड़ जमीन में कतार बोनी हो जाती है। कृषि अधिकारी ने किसानों को समझाईस दी कि वे धान के प्रमाणित किस्म के बीज ही अपने खेतों में बोएं ताकि उनका अनुकरण समय पर पर्याप्त संख्या में हो सके। उन्होंने किसानों को बताया कि उच्चहन भूमि में दलहन, तिलहन की फसले बोना फायदेमंद होगा, जबकि मध्यम और नीचली भूमि में धान की फसल लेने पर फायदा होगा।

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