चिराग पासवान ने बढ़ाई मोदी सरकार की मुश्किलें, SC-ST कानून पर लिखा खत

नई दिल्ली : लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) के अध्यक्ष और मोदी सरकार में मंत्री रामविलास पासवान के घर पर एनडीए के दलित सांसदों की बैठक हुई जिसमें एससी/एसटी अत्याचार निरोधक कानून और सरकारी नौकरियों में प्रोमोशन में आरक्षण जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई.

चिराग पासवान ने पीएम मोदी को खत लिखकर कहा कि नौ अगस्त को फिर से हिंसा न हो, इसके लिए एके गोयल को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के चेयरमैन पद से सरकार तुरंत बर्खास्त करे.

2 – संसद के इसी मानसून सत्र में SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ संशोधित बिल लाया जाए,

लोक जनशक्ति पार्टी के सांसद चिराग पासवान ने अनुसूचित जाति और जनजाति के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत लिखा है, जिससे केंद्र सरकार की मुश्किलें बढ़ गई हैं.

चिराग पासवान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत लिखकर कहा कि 20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट के जज एके गोयल ने SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम पर फैसला सुनाया गया था.

इससे अनुसूचित जाति और जनजाति समुदाय में असंतोष और आक्रोश हैं. चिराग पासवान ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग ने दो फरवरी को आंदोलन के दौरान उग्र प्रदर्शन किया था,

जिसके चलते जानमाल का काफी नुकसान हुआ था और हमारी एनडीए सरकार के खिलाफ अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों में बिना वजह अविश्वास का माहौल बना.

एक बार फिर से अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग ने नौ अगस्त को भारत बंद का आह्वान किया है. इस बार प्रदर्शन और ज़्यादा उग्र होने की संभावना जताई जा रही हैं, जिसको देखते हुए हमें उचित कदम उठाने की आवश्यकता है.

चिराग पासवान ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के जिस जज एके गोयल ने SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम पर फैसला सुनाया था, उन्हें रिटायरमेंट के बाद नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल का चैयरमेन बनाया गया है.

सरकार के इस फैसले से अनुसूचित जाति और जनजातीय में संदेश गया कि सरकार ने SC/ST के खिलाफ फैसला सुनाने के लिए जस्टिस एके गोयल को पुरस्कृत किया है.

चिराग पासवान ने पीएम मोदी को लिखे खत में कहा कि नौ अगस्त को फिर से हिंसा न हो, इसके लिए आप ये कदम उठाएं….

1 – एके गोयल को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के चेयरमैन पद से सरकार तुरंत बर्खास्त करे.

2 – संसद के इसी मानसून सत्र में SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ संशोधित बिल लाया जाए, जिसमें अनुसूचित जाति और जनजातिय की सुरक्षा को फिर से बहाल किया जा सके.

अगर इसमें किसी भी तरह की अड़चन आती है, तो संसद के सत्र को 10 अगस्त की जगह आठ अगस्त को समाप्त कर इस पर अध्यादेश लाया जाए.

इससे अनुसूचित और जनजाति वर्ग के बीच सरकार के प्रति विश्वास का माहौल पैदा होगा. साथ ही 20 मार्च से पहले की स्थिति बहाल हो सकेगी और नौ अगस्त को भारत बंद से होने वाले नुकसान को रोका जा सकेगा.

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