क्रोकोडायल पार्क में अभी तक पूरी नहीं हो पाई सीटी बस की मांग

भरत ठाकुर :

strong>बिलासपुर : /strongजिला जांजगीर-चांपा अकलतरा विकासखंड के अंतर्गत ग्राम कोटमीसोनार में पर्यटन के लिए सिटी बस की मांग के लिए कई बार कार्यलय का चक्कर कांट रहे कोतमीसोनार के ग्रामीणो द्वारा कोई भी अर्जी प्रशासन के द्वारा नहीं किया गया,

क्रोकोडायल पार्क में अभी तक पूरी नहीं हो पाई सीटी बस की मांग
क्रोकोडायल पार्क में अभी तक पूरी नहीं हो पाई सीटी बस की मांग

अकलतरा से मात्र 7 किलोमीटर की दूरी पर एंव मस्तूरी से लगभग 6 किलोमीटर दूरी पर क्रोकोडायल पार्क है, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा करोड़ो का खर्च करके क्रोकोडायल पार्क का निर्माण कराया गया है,

लेकिन छोटी सी सीटी बस की मांग पूरी हो जाता है तो पर्यटक के लिए खर्चा नहीं बरोबर के माफिक रहेगा जिससें पर्यटक की भीड़ बड़ते ही रहेगे,

जांजगीर-चांपा जिले की अपनी खास पहचान है, वैसे तो जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा पार्क में संरक्षित मगरमच्छों के भोजन के नाम पर हर साल लाखों रूपए का वारा-न्यारा करने की शिकायत आती ही रही है,

लेकिन अब यहां अव्यवस्था चरम पर है, आपको बता दें कि पार्क मुड़ा तालाब में मगरमच्छों के लिए वन विभाग हर साल भोजन के रूप में मछली की व्यवस्था करवाता है,

हालंकि कितने लागत की मछली इस तालाब में डाली जाती है , यह तो आज तक जगजाहिर नहीं हुआ है, लेकिन ग्रामीणों का हमेशा से आरोप रहा है, कि जिम्मेदार अधिकारी न केवल मगरमच्छों के आहारन की राशि डकार जा रहें है,

बल्कि पार्क की बदहाली को ठीक करने भी किसी तरह का ध्यान नहीं दे रहे है, ताजा मामला मुड़ा तालाब के जलस्तर घटने से संबधित है, वर्तमान में मुड़ा तालाब का जलस्तर एकदम घट गया है, जिसके चलते मगरमच्छों के आहार बतौर तालाब में डाली गई मछलियां तड़प कर मर रही है,

ग्रामीणों ने बताया कि तालाब के किनारे रोजाना सैकड़ों मछलियां मरी हुई देखी जा रही है, ऐसी स्थित पिछले एक माह से है, खास बात यह है कि इस बात की जानकारी ग्रामीणों द्वारा पार्क प्रभारी सहित जिला वन मंडलधिकारी सतोविशा समाजदार को कई मर्तबा दी जा चुकी है

लेकिन उन्हें पार्क पहंुचकर झांकने तक की फुर्सत नहीं है, ग्रामीणों का कहना है कि कुछ दिनों पहले उन्होने इस संबंध में डीएफओ समाजदार से बात की तब उन्होंने विकास यात्रा के कार्यक्रम में व्यस्त होने का हवाला देकर अपना पल्ला झाड़ लिया,

इसके बाद उन्होंने कलेक्टर को भी इस मामले से अवगत करवाया, लेकिन उन्होंने भी इस दिशा में कोई पहल नहीं कि, ग्रामीणों का आरोपी है कि जिम्मेदार अधिकारी अपनी मनमानी कर इस पार्क को बंद करवाने के फिराक में है,

यही वजह है कि पार्क की व्यवस्था को दुरूस्त करने कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है, ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी यहां संरक्षित मगरमच्छों के आहार की राशि को डकार जा रहे है ,

जिसके चलते पार्क में संरक्षित मगरमच्छों की आए दिन भूख-प्यास से मौत हो रही है, उनका कहना है कि कुछ दिन पहले जब एक मगरमच्छ की मौत हुई , तब उसका पोस्टमार्टम करवाया गया,

इस दौरान मगरमच्छ के आंत से कंकड और मिट्टी के अवषेश मिले जिससे यह बात साफ है कि क्रोकोडायल पार्क में संरक्षित मगरमच्छों को पर्याप्त आहार नहीं मिल रहा है, और भूख से उनकी मौत हो रही है, बहरहाल यदि समय रहते का्रेकोडायल पार्क की सुध न ली गई तो आने वाले दिन में इस पार्क का नामोंनिशान मिट जाएगा,

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