छत्तीसगढ़

डेंजर जोन में थम नहीं रहे हादसे, साल भर में सड़क दुर्घटना में इतने लोगों ने गंवाई जान

अंकित मिंज

बिलासपुर।

जिले के डेंजर जोन में सड़क हादसों में लगातार लोगों की मौत और घायल होने का सिलसिला जारी है। वर्ष 2018 में 1346 सड़क हादसों में 349 लोगों की मौत हो गई। वहीं 953 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। लगातार हादसों के बाद भी डेंजर जोन को सेफ जोन बनाने के लिए पुलिस, नगर निगम और पीडब्ल्यूडी ने पहल नहीं की है।

जिले में कुल 25 डेंजर जोन ऐसे हैं, जहां से गुजरते समय लोग विशेष सावधानी बरत रहे हैं। सतर्क लोग डेंजर जोन से गुजरते समय बच जाते हैं, लेकिन नए और अनभिज्ञ लोग सड़क हादसों के शिकार हो रहे हैं। डेंजर जोन ऐसे हैं जहां न ही संकेत बोर्ड लगे और न ही हादसों के भौगोलिक कारणों की समीक्षा की गई है। सड़कें ट्रैफिक इंजीनियरिंग के अनुसार बनी है या नहीं इसके कारण जानने के प्रयास भी नहीं हुए हैं। अधिकांश डेंजर जोन पर सड़कें समतल नहीं हैं। यही कारण है कि लगातार सड़क हादसे हो रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं बनी रोड सेफ्टी बॉडी

देश में हर 3 मिनट में सड़क हादसों में 1व्यक्ति की मौत होने पर सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2018 में केन्द्र व राज्य सरकारो को आदेश जारी कर सड़क हादसे और मौतों को रोकने के लिए रोड सेफ्टी बॉडी का गठन करने के आदेश दिया था। रोड सेफ्टी बॉडी में पुलिस, पीडब्ल्यूडी, नगर निगम, परिवहन विभाग, स्वास्थ्य विभाग और ट्रैफिक पुलिस के अधिकारियों को शामिल करने कहा था।

रोड सेफ्टी बॉडी जिला व थाना स्तर पर बनाने के निर्देश थे। रोड सेफ्टी बॉडी को दुर्घटना जन्य स्थानों पर जाकर हादसे रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए थे। डेंजर जोन की भौगोलिक स्थिति का आंकलन कर नगर निगम व पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को संकेत बोर्ड लगाने, ब्रेकर और स्टॉपर लगाकर लोगों को डेंजर जोन के लिए सूचित करने कहा गया था।

साथ परिवहन विभाग को वाहनों की गति सीमा नियंत्रित करने, स्वास्थ्य विभाग को डेंजर जोन के आसपास हादसे होने पर तत्काल उपचार के लिए प्राथमिक चिकित्सा व्यवस्था करने और पुलिस को हादसे वाले क्षेत्र में नियमित गश्त करने के निर्देश दिए गए थे। कोर्ट द्वारा आदेश जारी होने के 11 महीनों के बाद भी रोड सेफ्टी बॉडी नहीं बनाई गई है।

भेजे गए कई प्रस्ताव

जिला सड़क सुरक्षा समिति के सदस्य सैय्यद जफर अली ने कहा कि लगातार सड़क हादसे होना चिंतनीय है। शहर और जिले के डेंजर जोन को सुरक्षित बनाने के लिए पिछले 15 वर्षों से लगातार प्रस्ताव बनाकर भेजे गए हैं, जिसमें सड़कों और तिराहों को ट्रैफिक इंजीनियरिंग के अनुरूप बनाने कहा गया था, लेकिन समिति के प्रस्तावों पर प्रशासन ने अमल नहीं किया है। सड़क सुरक्षा समिति के प्रस्तावों को दरकिनारे कर अधिकारी गोल बाजार और मानसरोवर चौक में आकर अटक जाते हैं। ट्रैफिक इंजीनियरिंग के अनुरूप व मानक स्तर की सड़क व व्यवस्था नहीं बनेगी तब तक सड़क हादसों को रोकना संभव नहीं है।

खतरनाक डेंजर जोन

जिले में करीब 25 डेंजर जोन ऐसे हैं जहां लगातार हादसे हो रहे हैं। गौरेला थानांतर्गत बंजारी घाट,कोटा थानांतर्गत अमने मोड़,तखतपुर थानांतर्गत , लिदरी मोड़ , जोधरा मोड़, बेलसरी मोड़, बरेला पुल, सकरी थानांतर्गत काठाकोनी पुल, चोरभऋी मोड़, रतनपुर थानांतर्गत बगदेवा मोड़, कोनी थानांतर्गत गतौरी मोड़, बिलासाताल मोड़, चकरभाठा थानांतर्गत छतौना मोड़, हिर्री थानांतर्गत पेण्ड्रीडीह चौक, अमसेना चौक, खरकेना मोड़, मोहदा मोड़, बिल्हा मोड़, मस्तूरी किरारी मुख्य मार्ग, सीपत जांजी मोड़, मोपका तिराहा, बसंत विहार चौक, लोधी पारा मुख्य मार्ग, डीआईजी तिराहा, राजीव गांधी चौक, जरहाभाठा मंदिर चौक,इंदू चौक शामिल हैं।

चौक और सड़क पर ढाल है जानलेवा

शहर के लोधीपारा और राजीव गांधी चौक, डीआईजी तिराहा समेत कई चौक चौराहे की सड़के ट्रैफिक इंजीनियरिंग के अनुरूप नहीं है। राजीव गांधी चौक पर सड़क उंची और नीचे हैं। ऐसी ही सड़क लोधीपारा मुख्य मार्ग की है, जहां मोड़ पर सड़क में ढाल है। वहीं डीआईजी तिराहे पर सड़क में ढाल होने से यहां लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं।

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