खुज्जी में बागी बिगाड़ेंगे समीकरण, कांग्रेस के आगे जीत बचाने की चुनौती

रायपुर।

छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद सामान्य वर्ग की सीट खुज्जी सीट पर अब तक हुए चुनाव में एक बार भाजपा तो दो बार कांग्रेस का कब्जा रहा। वर्तमान में यहां से भोलाराम साहू विधायक चुने गए हैं।

साल 2003 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर भाजपा ने इस सीट पर राजेंदरपाल सिंह भाटिया को अपना उम्मीदवार बनाया था, जो जीतकर विधानसभा में पहुंचने में कामयाब रहे। कांग्रेस की ओर से भोला राम साहू मैदान में थे। राजेंदरपाल सिंह भाटिया ने बहुकोणीय मुकाबले में भोलाराम साहू को 1113 मतों से हराया। भाजपा के राजेंदरपाल सिंह भाटिया को 45409 मत मिले वहीं भोलाराम साहू को 44296 मत मिले।

एनसीपी की उर्मिला साहू 4.07 वोट शेयर के साथ 4070 मत प्राप्त कर तीसरे स्थान पर रही। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी इंदल सिंह 3.36 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 3366 मत प्राप्त कर चौथे व सपा के बलराम यादव 2.93 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 2928 मत प्राप्त कर पांचवें स्थान पर रहे।

साल 2008 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अपना उम्मीदवार बदलते हुए जमुना देवी साहू को मैदान में उतारा, जिन्हें कांग्रेस के भोलाराम साहू के हाथों 16119 मतों से हार का सामना करना पड़ा। भोलाराम साहू को 57456 मत मिले वहीं जमुना देवी साहू को 41475 मतों से संतोष करना पड़ा। बीएसपी के भगत राम सोनी 4.78 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 5471 मत प्राप्त कर तीसरे स्थान पर रहे। सपा के बृजेश कुमार चौथे व जेसीजीपी के गेंद लाल निषाद पांचवें स्थान पर रहे।

साल 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अपने पूर्व विधायक भोलाराम साहू को दोबारा अपना उम्मीदवार बनाया जो अपनी जीत बचा पाने में कामयाब रहे। वहीं भाजपा ने अपना उम्मीदवार बदलते हुए विजय दुखू साहू को अपना उम्मीदवार बनाया था। इस चुनाव में भाजपा को तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा।

कांग्रेस के भोलाराम साहू ने बहुकोणीय मुकाबले में भाजपा के को 8694 मतों से हराया। भोलाराम साहू को 51873 मत मिले वहीं विजय दुखू साहू को 28122 मतों से संतोष करना पड़ा। भाजपा के बागी उम्मीदवार राजेंदरपाल सिंह भाटिया 31.28 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 43179 वोट प्राप्त कर दूसरे स्थान पर रहे। नोटा चौथे व एनसीपी के देवानंद सहारे 1.89 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 2612 मत प्राप्त कर पांचवें स्थान पर रहे।

कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले चुनाव में भाजपा पार्टी में वापसी किए अपने पूर्व विधायक राजेंदरपाल सिंह भाटिया को दोबारा मैदान में उतार सकती है वहीं कांग्रेस को एंटीइनकम्बेंसी का डर सता रहा है। कांग्रेस अबकी बार अपना उम्मीदवार बदल सकती है। इस बार जोगी-बसपा गठबंधन के अलावा आम आदमी पार्टी भी मैदान में है, ऐसे हालात में कांग्रेस के आगे अपनी जीत बचाने की चुनौती होगी तो भाजपा जीत की पुरजोर कोशिश में लगी है। फिलहाल बहुकोणीय मुकाबले के आसार हैं।

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