कानन पेंडारी में उम्रदाराज मादा तेंदुआ की हालत ख़राब, कीमा से की जा रही है भूख शांत

भारत सिंह ठाकुर :

बिलासपुर : वन्यप्राणियों को लेकर कानन पेंडारी जू प्रबंधन की चिंता खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। अब मादा तेंदुआ मोहनी की सेहत खराब है। उम्रदाराज होने के कारण उसके सारे दांत घिस चुके हैं।

वह आहार में मटन और चिकन नहीं खा पा रही है। ऐसी स्थिति में कीमा से उसकी भूख शांत की जा रही है। हालांकि इसे भी आधे पेट खाती है।

पिछले दिनों मोहनी की संतान कानन व डायना की मौत हो चुकी है। तेंदुए की उम्र 14 से 16 साल की होती है। मोहनी 20 साल की हो गई है। इसे वर्ष 2000 में रेस्क्यू कर कानन जू लाया गया था।

यहां आने के बाद वह पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र रही। अब उम्रदराज होने के कारण शारीरिक कमजोर हो गया है। इसकी वजह भरपेट आहार करने में सक्षम नहीं होना है। इसका पता कुछ महीने पहले चला।

जांच करने पर पता चला कि उसके सारे दांत घिस गए हैं। लिहाजा दूसरे दिन से ही कीमा देने का आदेश दिया गया। जू कीपर उसे खाने में यही दे रहे हैं। लेकिन इसे भी वह ठीक तरह नहीं खा पाती।

हर दिन आधा कीमा छोड़ देती है। हालांकि अभी किसी तरह खतरा नहीं है। जू प्रबंधन इसकी गिरते सेहत को लेकर चिंतित है। जू कर्मचारियों को खास तौर पर तेंदुए का ख्याल रखने के लिए कहा गया। साथ ही उसकी निगरानी भी की जाती है। पशु चिकित्सक समेत अफसरों को वह प्रतिदिन इसकी रिपोर्ट भी देते हैं।

कानन पेंडारी जू की मादा तेंदुआ उम्रदराज हो गई है। उसके सारे दांत घिसने के कारण मटन या चिकन नहीं खा पाती। इसे देखते हुए उसे आहार में कीमा दिया जा रहा है। कर्मचारियों से उसकी लगातार निगरानी कराई जा रही है।

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