छत्तीसगढ़

राष्ट्रीय स्पर्धा में मधुमक्खियों से कीटों पर नियंत्रण का होगा विचार, सर्वज्ञा करेंगी छग का प्रतिनिधित्व

ब्यूरो चीफ:- विपुल मिश्रा

बिलासपुर :जिले की प्रतिभावान छात्रा सर्वज्ञा सिंह अब राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करेंगी। डीपीएस एनटीपीसी में कक्षा सातवीं की छात्रा का विज्ञान प्रोजेक्ट राज्य स्तरीय स्पर्धा में सफल होकर राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन के लिए चयनित किया गया है

सर्वज्ञा ने लूपर मोथ कैटरपिलर, एफिड्स इंफेक्शन व फसलों में कीट प्रकोप के निराकरण के लिए रसायनिक उपचार की बजाय प्राकृतिक कीटभक्षियों जैसे मधुमक्खी, ततइया की पहचान व प्याज से बने जैव कीटनाशकों के उपाय पर अपना प्रोजेक्ट प्रस्तुत किया।

छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के तत्वावधान में राज्य स्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस का वर्चुअल आयोजन जैव प्रौद्योगिकी अध्ययन शाला पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर में किया गया। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार के सहयोग से हुआ।

राज्य स्तर पर 125 परियोजनाओं का वर्चुअल प्रस्तुतिकरण केंद्र व राज्य शासन के दिशा-निर्देश में कोविड-19 संक्रमण को ध्यान में रखते हुए डीएसटी से लिए गए निर्णय अनुसार आनलाइन मोड में किया गया।

राज्य स्तर पर कुल 16 परियोजनाओं का चयन राष्ट्रीय स्तर के लिए किया गया है, जिसमें कोरबा जिले से कक्षा सातवीं की छात्रा सर्वज्ञा सिंह का चयन राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम के लिए हुआ है। सर्वज्ञा ने अपनी मार्गदर्शक शिक्षिका रेखा शर्मा के सहयोग से इस परियोजना को पूर्ण किया। समापन सत्र में पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर केएल वर्मा,

छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के महानिदेशक मुदित कुमार सिंह, राज्य समन्वयक जे के राय उपस्थित थे। सर्वेज्ञा की इस सफलता पर जिला शिक्षा अधिकारी सतीश पांडेय, डीपीएस एनटीपीसी के प्राचार्य सतीश शर्मा एवं जिला शैक्षिक समन्वयक कामता जायसवाल ने हर्ष व्यक्त करते हुए आशीर्वाद प्रदान किया।

राज्य स्तर पर 25 जिलों से 374 परियोजनाओं की प्रस्तुति

इस वर्ष राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस का मुख्य विषय सतत जीवन के लिए विज्ञान तथा पांच उप विषय जिसमें सतत जीवन के लिए परितंत्र, उचित प्रौद्योगिकी, सामाजिक नवाचार, निरूपण विकास एवं माडलिंग व पारंपरिक ज्ञान प्रणाली शामिल हैं।

जिला समन्वयक डा फरहाना अली ने बताया कि 25 जिलों से कुल 374 परियोजनाएं जिला स्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस में प्रस्तुत की गई। सर्वज्ञा ने पिता सुमित सिंह सीएसईबी अधिकारी, माता निधि सिंह कमला नेहरू महाविद्यालय कोरबा में सहायक प्राध्यापक हैं।

प्राकृतिक शिकारियों का संरक्षण, प्रदूषण की रोकथाम पर फोकस

सर्वज्ञा सिंह ने एकीकृत कीट प्रबंधन-प्राकृतिक कीटभक्षियों और जैव कीटनाशकों से लूपर मोथ कैटरपिलर और एफिड्स इंफेक्शन का निराकरण, लूपर कीट कैटरपिलर और एफीड्स के प्राकृतिक शिकारियों की पहचान और संरक्षण विषय पर अपना प्रोजेक्ट प्रस्तुत किया

फसलों पर माहो के प्रकोप से बचने के लिए सामान्यतः रासायनिक कीटनाशक का प्रयोग किया जाता है। सर्वज्ञा ने प्याज के छिलके और हल्दी को मिलाकर स्प्रे तैयार किया जो, माहो के प्रकोप से तो बचाता ही है साथ ही मृदा और जल प्रदूषण को भी रोकता है।

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