18 साल के शासनकाल में राज्य शासन ने बिलासपुर में बदले 15 कलेक्टर

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ राज्य को बने अभी 18 वर्ष ही हो पाया है। इस अवधि में राज्य शासन बिलासपुर जिले में अब तक 14 कलेक्टरों को आजमा चुका है। हाल ही में हुए आइएएस के तबादलों में जिले का नाम भी है।

कलेक्टर पी दयानंद का तबादला रायपुर कर दिया गया है। उनकी जगह पर डॉ. संजय अलंग की पदस्थापना की गई है। डॉ.अलंग ने मंगलवार को अपना पदभार ग्रहण कर लिया है।

वे जिले के 15 वें कलेक्टर होंगे । तत्कालीन प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने एक नवंबर 2000 को मध्यप्रदेश से अलग कर छत्तीसगढ़ को पूर्ण राज्य का दर्जा प्रदान किया था।

उस वक्त कलेक्टर के शैलेंद्र सिंह थे । शैलेंद्र सिंह की नियुक्ति अविभाजित मध्यप्रदेश सरकार द्वारा की गई थी। चूंकि राज्य विभाजन के समय वे बिलासपुर कलेक्टर के पद पर काबिज थे लिहाजा उनको ही यहां पहले कलेक्टर के रूप में दर्जा दिया गया है।

केंद्र व राज्य शासन की योजनाओं को गति देने की आपाधापी कहें या फिर राजनीतिक कारणों के चलते राज्य शासन का फैसला,बिलासपुर जिले में कलेक्टर के पदस्थापना में लगातार प्रयोग ही किया गया है।

आइएएस विकासशील, सोनमणी बोरा और ठाकुर रामसिंह ही भाग्यशाली रहे जिन्होंने ढाई से लेकर तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा किया। शेष 11 कलेक्टर तीन वर्ष का कार्यकाल ही पूरा नहीं कर पाए ।

-तय अवधि से पहले हुआ तबादला

तय अवधि से पहले ही राज्य शासन ने उनका तबादला आदेश जारी कर दिया । जिले में कलेक्टरों के पदस्थापना के आंकड़ों पर गौर करें तो 18 वर्ष में 14 आइएएस ने यहां कलेक्टरी की है। डॉ.अलंग 15 वें कलेक्टर हैं जिनका कार्यकाल मंगलवार 25 दिसंबर से प्रारंभ हो गया है।

तीन साल में बदले चार कलेक्टर

राज्य निर्माण के प्रारंभिक दौर में कलेक्टरों के तबादलों का जोर चला। आलम ये कि महज तीन वर्ष के भीतर राज्य शासन ने चार आइएएस को जिले के कलेक्टर के रूप में आजमाया था । विकासशील व सोनमणि बोरा को कलेक्टरी करने दो टर्म मिला।

आइएएस जिन्होंने जिले में की कलेक्टरी

शैलेंद्र सिंह,सुनील कुजूर,आरपी मंडल,अमिताभ जैन, विकासशील,गौरव द्विवेदी,सुबोध कुमार सिंह,सोनमणि बोरा, ठाकुर राम सिंह,सिद्घार्थ कोमल सिंह परदेशी,अन्बलगन पी,पी दयानंद,डॉ.संजय अलंग ।

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