रायपुर लोकसभा के 7 बार के सांसद रमेश बैस की टिकट कटने के बाद किस रोल में होगी भूमिका? बैस का पार्टी में कद बढ़ेगा या फिर…!

रायपुर:देश के सबसे बड़े लोकतांत्रिक पर्व आम चुनाव का बिगुल बच चुका है।लोकसभा चुनाव में इस बार विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपने कई विनिंग सांसदों की टिकट काटकर नए चेहरों पर दांव खेला है।कोई भी राजनीतिक पार्टी जनता के मूड के आगे रिस्क लेने को तैयार नहीं है।

इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ की हाइप्रोफाइल रायपुर लोकसभा सीट में भी भाजपा ने अपने 7 बार के विजयी प्रत्याशी और पूर्व सांसद रमेश बैस का टिकट काटकर नए चेहरे पर दांव खेला है।भाजपा ने इस बार रायपुर लोकसभा सीट से रायपुर के पूर्व महापौर सुनील सोनी को मैदान में उतारा है।

भाजपा ने जहां पूर्व महापौर सुनील सोनी पर दांव खेला है, तो वहीं कांग्रेस ने वर्तमान महापौर के कंधों में जीत की जिम्मेदारी सौंपी हैं।ऐसे में अब देखना ये होगा कि पूर्व महापौर बनाम वर्तमान महापौर की चुनावी जंग में जीत का खिताब किसके सिर सजता है? चुनाव परिणाम आने के साथ ही इस बात का फैसला हो ही जायेगा।

लेकिन इन सबके बीच एक बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि रायपुर लोकसभा सीट से 7 बार के विजयी रमेश बैस की टिकट आखिर क्यों काट दी गयी?टिकट कटी तो कटी ,लेकिन ताजुब्ब की बात ये है कि इतने बड़े दिग्गज नेता से रायशुमारी भी नहीं की गई।टिकट कटने के बाद से ही रमेश बैस ने दिल्ली में अपना डेरा जमा लिया था।

लेकिन कुछ दिनों बाद बैस जी का गुस्सा शांत हुआ और वो वापस रायपुर लौट आये। यहां माना विमानतल में उनका भव्य स्वागत भी किया गया।खैर ये तो होना ही था।इस चुनावी आपाधापी में टिकट कटते हैं और नए चेहरों को टिकट बटते भी हैं।

लेकिन अब जो अहम बात निकलकर आ रही है वो ये कि रमेश बैस की लोकसभा चुनाव में टिकट कटने के बाद अब उन्हें पार्टी किस भूमिका में बैठायेगी? पार्टी में उनका कद बढ़ेगा या फिर चुनाव के बाद सबकुछ भूली बिसरी यादों की तरह हो जाएगा।

हालांकि इसका फैसला तो आलाकमान तय करेगा?लेकिन फिर भी राजनीतिक गलियारों में ये मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है और इस चर्चा पर फैसले का सबको इन्तेजार भी है।

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