राजधानी के महिला थाने में घरेलू विवादों का है भंडार, ऐसे होती है काउंसलिंग

सबसे ज्यादा मामले तो शादीशुदा महिलाओं के होते है जो अपने ससुराल पक्ष द्वारा पीड़ित होती है|

रायपुर।
घरेलू विवाद एक आम समस्या बन गयी है और इसे निपटाने के लिए अक्सर थाने का रुख किया जाता है|

परिवार मे आपसी मत भेद होना या फिर पुरुष का किसी महिला के प्रति हिंसक व्यवहार अपनाना घेरेलु विवाद का ही एक हिस्सा है|

ऐसे ही विवाद को के बहुत से मामले राजधानी रायपुर के कालीबाड़ी महिला थाने मे लगभग कई वर्षो से आ रहे है लेकिन विगत 5 वर्षों से यहाँ काउन्सलर इन मामलों को सुलझाने में सक्रिय भूमिका निभा रहें है|

हर महीने लगभग 300 शिकायतें, घरेलू विवाद के यहाँ पर दर्ज होते हैं और सबसे ज्यादा मामले तो शादीशुदा महिलाओं के होते है जो अपने ससुराल पक्ष द्वारा पीड़ित होती है|

यही नही बल्कि पुरुष पीड़ितो की भी संख्या कम नही है इनके भी हर महीने बहुत से मामले दर्ज होते है जो खासकर ये बोलते है, उनकी पत्नी अपने मायके पक्ष से प्रभावित होकर ससुराल मे कलह का माहौल पैदा कर रही है|

ये सम्पूर्ण जानकारी महिला थाना प्रभारी भारती मरकाम जी से बात चित पर पता चली उन्होने आगे बताया की घरेलू विवाद जैसे: पति-पत्नी में मनमुटाव, ससुराल पक्ष का महिला को उत्पीड़न देना, विवाह में धोखा-धड़ी ऐसे मामलों के भंडार है|

उन्होने थाने की कार्यवाही के बारे मे बताया की किसी भी मामले की जब शिकायत दर्ज होती है तो सबसे पहले मामले की जांच की जाती है यदि शिकायत मे सत्यता नजर आती है तभी मामले को आगे बढ़ाया जाता है व दोनों पक्षों को थाने मे बुलाकर उनके पक्ष की बात रखने को कहा जाता है|

काउंसलिंग की सुविधा :
विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ता काउंसलिंग के लिए स्वतः सहयोग करते है। उन्हें एक तय दिन दिया जाता है जिसमें उन्हें काउंसलिंग के लिए बुलाया जाता है| यदि आवश्यकता होती है तब काउंसलिंग के दिन को बढ़ाया भी जाता है अक्सर 50% मामलों मे आपसी सहमती से समाधान निकाल जाता है और यदि मामला अधिक गंभीर है उस स्थिति में मामले को कोर्ट ले जाने की सलाह दी जाती है|<>

 

 

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