वास्तु

किस दिशा में हो पूजा का स्थान कि मिले शुभफल

मुखिया सात्विक विचारों वाला होता है

भगवान के दर्शन मात्र से ही कई जन्मों के पापों का प्रभाव नष्ट्र हो जाता है। इसी वजह से घर में भी देवी-देवताओं की मूर्तियां को रखने की परंपरा है।

इस कारण घर में छोटा मंदिर होता है, और उस मंदिर में देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित की जाती है।

पिछले कुछ वर्षों से वास्तुशास्त्र के प्रति लोगों का आकर्षण बहुत बढ़ा है। घर में पूजा का स्थान भवन के ईशान कोण में होना चाहिए।

यदि किसी घर में पूजा का स्थान ईशान कोण में न हो और परिवार में रहने वालों के साथ कोई परेशानी हो तो उनके मस्तिष्क में एक ही बात उठती है। परिवार की समस्या का कारण पूजा के स्थान का गलत जगह पर होना है।

ज्यादातर वास्तुशास्त्र पूजा घर को भवन के उत्तर व पूर्व दिशाओं के मध्य भाग ईशान कोण में स्थानान्तरित करने की सलाह देते है और जरूरत प़डने पर बहुत तो़ड-फो़ड भी कराते हैं।

यह सही है कि ईशान कोण में पूजा का स्थान होना अत्यंत शुभ होता है क्योंकि ईशान कोण का स्वामी ग्रह गुरू है। यहां घर की किस दिशा में पूजा के स्थान का क्या प्रभाव पडता है /p>

ईशान कोण: ईशान कोण में पूजा का स्थान होने से परिवार के सदस्य सात्विक विचारों के होते हैं। उनका स्वास्थ्य अच्छा रहता है और उनकी आयु बढ़ती है।

पूर्व दिशा : इस दिशा में पूजा का स्थान होने पर घर का मुखिया सात्विक विचारों वाला होता है और समाज में इज्जत और प्रसिद्धि पाता है।

आग्नेय: इस कोण में पूजा का स्थान होने पर घर के मुखिया को खून की खराबी की शिकायत होती है। वह बहुत ही गुस्से वाला होता है किंतु उसमे निर्भीकता होती है। वह हर कार्य का निर्णय स्वयं लेता है।

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