डोंगरगढ़ में लोक मड़ई, कृषि मेला का शुभारंभ

सीएम बघेल ने कहा- लोक मड़ई छत्तीसगढ़ की अहम लोक परंपरा

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज डोंगरगढ़ विकासखंड के ग्राम लाल बहादुर नगर में दीप प्रज्वलित कर लोक मड़ई एवं कृषि मेला का शुभारंभ किया। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि लोक मड़ई छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण लोक परंपरा है। यहां फसल आने के पहले और फसल आने के बाद मड़ई का आयोजन किया जाता है। यह हमारे रहन-सहन, खान-पान एवं जीवनशैली का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आज यहां आयोजित लोक मड़ई एवं कृषि मेला में राम वन गमन पथ के साथ अच्छी प्रदर्शनी लगाई गई है। छत्तीसगढ़ में हरेली, तीजा, विश्व आदिवासी दिवस, मां कर्मा जयंती के पर्व पर भी अवकाश दिया जा रहा है।

हमने अपनी छत्तीसगढ़ी संस्कृति को संरक्षित एवं संवर्धित करने का कार्य किया है। मातृभाषा में शिक्षा देने के लिए गोड़ी, भतरी, कुडुख में बच्चों को शिक्षा दी जा रही है। उन्होंने इस अवसर पर लाल बहादुर नगर के हायर सेकेण्डरी स्कूल के भवन निर्माण की घोषणा की। कार्यक्रम में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री अमरजीत भगत, उद्योग मंत्री कवासी लखमा, विधायक डोंगरगांव एवं अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग विकास प्राधिकरण दलेश्वर साहू, खुज्जी विधायक मती छन्नी साहू, महापौर मती हेमा देशमुख एवं अन्य जनप्रतिनिधि तथा कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा, पुलिस अधीक्षक डी श्रवण उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। कुपोषण एवं अशिक्षा को दूर करने के साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में कार्य किए जा रहे है। लाख को खेती का दर्जा प्रदान किया गया है, वहीं न्यूनतम समर्थन मूल्य पर लघु वनोपज की खरीदी की जा रही है। इस वर्ष 20 लाख 53 हजार किसानों से 92 लाख मीट्रिक टन रिकार्ड धान की खरीदी की गई है। जिसमें किसानों को 17 हजार 322 करोड़ का भुगतान किया गया है। उन्होंने कहा कि कोरोना संकट के समय जब लॉकडाऊन की स्थिति थी, ऐसे संकट के समय में किसानों को राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत राशि प्रदान की गई। इस योजना के तहत किसानों को तीन किश्त की राशि दे दी गई है और चौथे किश्त की राशि 31 मार्च के पहले दी जाएगी। उन्होंने कहा कि किसानों के हित के लिए अनेक योजनाएं शासन द्वारा संचालित की जा रही है।

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम मंत्री अमरजीत भगत ने कहा कि मड़ई मेला जिले की पहचान बन चुकी है। कला संस्कृति को अक्षुण्य बनाए रखने के लिए जो प्रयास किए जा रहे हैं, वह सराहनीय है। छत्तीसगढ़ी गांव की संस्कृति की विशिष्ट पहचान है । छत्तीसगढ़ी गीत-संगीत की धाक अन्य राज्यों तक है। शासन द्वारा पिछले वर्ष आदिवासी नृत्य महोत्सव का आयोजन किया गया था। जिसमें देश-दुनिया के कलाकारों ने एक ही मंच पर प्रस्तुति दी। सबको जोड़ने की ताकत केवल संस्कृति में है और यह कार्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने किया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति तथा गीत-संगीत को मान-सम्मान और अभिमान मिला। मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की संस्कृति को देश-विदेश में पहचान दिलाने का अनुकरणीय कार्य किया।

उद्योग मंत्री कवासी लखमा ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किसानों की कर्ज माफी की और उनका धान खरीदा। किसान हितैषी मुख्यमंत्री किसानों की भलाई के लिए अनेक योजनाएं लेकर आए हैं। नरवा, गरूवा, घुरूवा, बाड़ी योजना के तहत किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत बन रही है, वहीं शासन गोधन न्याय योजना के तहत गोबर खरीद रही है। उन्होंने कहा कि तेंदूपत्ता, इमली, महुआ लघुवनोपज को न्यूनतम समर्थन मूल्य में खरीदने वाला छत्तीसगढ़ पहला राज्य है।

अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग विकास प्राधिकरण तथा विधायक डोंगरगांव दलेश्वर साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य की लोक संस्कृति को आगे बढ़ाया है और पहली बार हरेली, तीजा साहित अन्य छत्तीसगढ़ी पर्व पर अवकाश दिया जा रहा है। सभी के स्नेह से यह आयोजन किया गया है। कार्यक्रम के अंत में कलेक्टर टोपेश्वर वर्मा ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि धनेश पाटिला, नवाज खान, पदम कोठारी, कुलबीर छाबड़ा, भवेश सिंह, चेतन साहू, हीरा सोनी, सुरेश सिन्हा, टिकेश साहू, सुयश नाहटा, हीरा निषाद, गुलाब वर्मा, ललित लोढ़ा, संजीव गोमस्ता, राम छत्री चन्द्रवंशी, अजय अग्रवाल, प्रमोद अग्रवाल, रामू साहू, सुदेश मेश्राम, नीखिल द्विवेदी सहित अन्य जनप्रतिधि एवं ग्रामवासी उपस्थित थे।

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