आयकर विभाग ने लैपटॉप, मोबाइल के व्यापारी के कई ठिकानों पर रेड, कई आपत्तिजनक दस्तावेज मिले

आयकर विभाग ने लैपटॉप, मोबाइल फोन और पेरिफेरल पार्ट्स के एक आयातक और व्यापारी पर तलाशी अभियान चलाया और सामान की जब्ती की. एनसीआर, हरियाणा और पश्चिम बंगाल में फैले इस तलाशी अभियान में बड़े पैमाने पर इम्पोर्ट्स की अंडर-इनवॉइसिंग का पता चला. तलाशी के दौरान, कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डायरी और डिजिटल साक्ष्य मिले हैं, जिससे पता चलता है कि समूह बड़े पैमाने पर अंडर-इनवॉइसिंग और उसके द्वारा आयातित माल की गलत जानकारी दे रहा था.

अप्रतिबंधित लेनदेन, संपत्तियों में बेहिसाब निवेश, लिए गए फर्जी ऋण के कई सबूत भी एकत्र किए गए. हालांकि पिछले 3 वर्षों में इस तरह की कंपनी के घोषित आयात की कीमत लगभग 20 करोड़ रुपये बताई गयी है. पर यह अनुमान है कि इस अवधि के दौरान वास्तविक मूल्य 2000 करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है. तलाशी के दौरान 2.75 करोड़ रुपये की बेहिसाब नकदी जब्त की गई है.

इससे पहले आयकर विभाग ने मुंबई के दो रियल एस्टेट कारोबारी समूहों और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के परिवार के कुछ सदस्यों के परिसरों पर छापा मारकर करीब 184 करोड़ रुपए की अवैध आय का पता लगाया था. आयकर विभाग के नीति निर्माण निकाय केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने एक बयान में बताया कि मुंबई, पुणे, बारामती, गोवा और जयपुर के 70 परिसरों पर सात अक्टूबर को छापे मारे गए थे. बयान के अनुसार, ‘छापेमारी के दौरान मिले सबूतों के मुताबिक आय के ज्ञात स्रोत से ज्यादा धन और बेनामी धन के कई बार लेन-देन का पता चला. बयान में किसी का नाम बताए बिना कहा गया, ”दोनों समूहों की करीब 184 करोड़ रुपये का आय के ज्ञात स्रोत से अधिक धन के साक्ष्य मुहैया कराने वाले आपत्तिजनक दस्तावेज मिले हैं.”

छापेमारी के दौरान 2.13 करोड़ रुपए नकद जब्त

अजित पवार ने छापेमारी के दिन मीडिया से कहा था कि उनकी तीन बहनों के परिसरों पर भी आयकर ने छापेमारी की. उनकी एक बहन महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले और दो बहनें पुणे जिले में रहती हैं. सीबीडीटी ने कहा कि छापेमारी के दौरान 2.13 करोड़ रुपए नकद और 4.32 करोड़ रुपए के गहने जब्त किए गए थे जिनके हिसाब-किताब नहीं हैं. सीबीडीटी ने कहा, ”छापेमारी की इस कार्रवाई के बाद इन कारोबारी समूहों द्वारा कई कंपनियों के साथ ऐसे लेन-देन का पता चला, जो संदिग्ध लगते हैं.” सीबीडीटी ने दावा किया, ”निधियों के स्रोत के प्रारंभिक विश्लेषण से संकेत मिलता है कि फर्जी शेयर प्रीमियम, संदिग्ध असुरक्षित ऋण, कुछ सेवाओं के लिए अप्रमाणित अग्रिम राशि लेकर, मिलीभगत से मध्यस्थता सौदे करने जैसे संदेहास्पद तरीकों से समूह में अवैध धन आया.”

बयान में कहा गया, ‘विभाग ने पाया कि महाराष्ट्र के एक प्रभावशाली परिवार की मिलीभगत से संदिग्ध स्रोतों के जरिए धन मुहैया कराया गया.’ बयान में कहा गया, ”संदिग्ध तरीकों से मिले धन का इस्तेमाल मुंबई के एक मुख्य इलाके में कार्यालय की इमारत, दिल्ली के एक पॉश इलाके में फ्लैट, गोवा में रिसॉर्ट, महाराष्ट्र में कृषि भूमि और चीनी की मिलों में निवेश करने के लिए किया गया.” बयान में कहा गया है कि इन पूंजियों का बही-मूल्य करीब 170 करोड़ रुपए है.

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