छत्तीसगढ़

तेंदूपत्ता संग्रहण दर में बढ़ोत्तरी, संग्राहकों में खुशियो का माहौल

वन विभाग की तैयारी पूर्ण, डेढ लाख से अधिक संग्राहकों को होगा लाभ

कोरबा : वनांचल में रहने वाले ग्रामीणों के लिये तेंदूपत्ता अर्थात हरा सोना के प्रति मानक बोरा की दर में एक बार फिर हुई बढ़ोत्तरी ने खुशियां का माहौल बना दिया है। मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह द्वारा गत वर्ष तेंदूपत्ता प्रति मानक बोरा राशि 1500 रूपये से बढ़ाकर 1800 रूपए किया गया था। इस साल पुनः 1800 रूपये प्रति मानक बोरे से बढ़ाकर 2500 रूपये किये जाने की घोषणा से तेंदूपत्ता संग्राहक बहुत खुश है। संग्राहकों को जब से मालूम हुआ है कि इस साल प्रति मानक बोरा 700 रूपये बढ़ाई गई है वे तेंदूपत्ता तोड़ने के लिये ललायित है।

उन्हें उम्मीद है कि मुख्यमंत्री की इस पहल से वे अपनी कई जरूरतों को पूरा कर सकते है। जिले में कोरबा एवं कटघोरा वनमंडल में तेंदूपत्ता सग्रहण का काम होता है। कुल 754 संग्रहण केंद्रों में 82 सहकारी समितियों के माध्यम से एक लाख 60 हजार से अधिक तेंदूपत्ता संग्राहक परिवार मुख्यमंत्री की इस पहल से लाभान्वित होंगे। गर्मी के दिनों में जब उनके पास खेतों और घरों में कोई काम नही होता तब इसी तेंदूपत्ता यानी हरा सोना का संग्रहण उन्हें मेहनत एवं संग्रहण के आधार पर कुछ रूपये कमाने का अवसर देता है।

कोरबा विकासखंड के अंतर्गत आने वाले पतरापाली ग्राम पंचायत के आश्रित ग्राम ठाकुरखेता में लगभग 136 तेंदूपत्ता संग्राहक है। यहंा रहने वाले संग्राहक राजकुमार राठिया ने बताया कि वह और उसकी पत्नी अशोकी बाई गर्मी के दिनों में तेंदूपत्ता तोड़ने का काम करते है। गतवर्ष 2016 में 19 बोरा से अधिक संग्रहण किया था। इसके एवज में लगभग 3547 रूपये की दर से 68 हजार 385 रूपये बोनस के रूप में उसके खाते में प्रदान की गई। राजकुमार राठिया ऐसे तेंदूपत्ता संग्राहक है जिसने जिले में सबसे ज्यादा राशि 68 हजार तीन सौ रूपये वर्ष 2016 सीजन में तेंदूपत्ता बोनस के रूप में मिली है।

संग्रहण कार्य के अलावा एक बड़ी राशि बोनस के रूप में मिलने से राजकुमार बहुत खुश है। उसने राज्य शासन द्वारा 1500 से 1800 प्रति मानक बोरा के बाद इस साल से 2500 स्पये प्रति मानक बोरा में तेंदूपत्ता क्रय करने का निर्णय को वनांचल के ग्रामीणों के लिये वरदान बताते हुये कहा कि ग्रामीणों के लिये तेंदूपत्ता हरा सोना ही है। जो जितना अधिक संग्रहण कर पायेगा उसको उतना ही ज्यादा संग्रहण एवं बोनस राशि मिलने की गांरटी बढ जायेगी। ग्राम रजगामार की चैनकुवर कंवर एवं कौशिल्या बाई ने बताया कि कुछ दिनों के पश्चात वे तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य प्रारंभ करेगी। अभी कुछ काम नही होने से उन्हें खाली बैठना पड़ता है।

पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड की ग्राम रावा की रतिया बाई और शांति बाई अपने आसपास के जंगलों से तेंदूपत्ता संग्रहण कर उसे समिति में बेचने का कार्य पिछले वर्षों से कर रही है। एक सीजन में ढाई से तीन हजार रूपए तक कमाई करने वाली इन संग्राहिकाओं का कहना है कि वे सुबह से शाम तक पत्ते तोड़कर उसे बण्डल बनाती हैं, फिर समय निकाल कर पास के फड़ में बेच आती हैं। गर्मी के दिनों में उनका अधिकांश समय जंगल में ही गुजरता है। मुख्यमंत्री द्वारा 1800 रूपये प्रति बोरा राशि की दर को 2500 रूपए किए जाने पर खुशी जताते हुए रतिया बाई ने इससे संग्राहकों को लाभ पहुंचने की बात कही।

रावा की ही शांति बाई ने कहा कि पिछले साल 1500 रूपये से बढ़ाकर 1800 रूपये किया गया था अब 2500 रूपये कर दिया गया है। इससे वन में रहकर तेंदूपत्ता तोड़ने वाली महिलाओं को लाभ मिलेगा। ग्राम रावा की रहने वाली पंडो जनजाति की सिरमति बाई का ने बताया कि वह अपने बहू के साथ कई साल से तेंदूपत्ता तोड़ने का कार्य कर रही है। घर में सात सदस्य है। सभी जंगल नही जा पाते लेकिन समय मिलने पर आसपास ही तेंदूपत्ता तोड़कर इक्टठा करते है। उसने संग्राहकों के हित में 1500 की राशि 1800 रूपए प्रति मानक बोरा होने पर गरीब संग्राहकों को इससे फायदा होने की बात कही। शासन ने संग्राहकों के परिश्रम का महत्व को समझते हुए राशि बढ़ाई है जा सराहनीय है।

कोरबा विकासखंड के ग्राम कुटरूवा की तिर्की ने कहा कि गर्मी के दिनों में कई घरों में शादी विवाह होता है। ग्रामीण कर्ज में डूबे होते हैं। तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य से अतिरिक्त राशि की प्राप्ति होती है, जिससे उन्हें आर्थिक लाभ पहुंचता है। इस प्रकार तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिये प्रति मानक बोरा दर में वृद्धि से हम जैसे वनांचल में रहने वाले सभी तेंदूपत्ता संग्राहकों को लाभ मिलेगा। कोरबा एवं कटघोरा वनमंडल में तैयारी पूर्ण कोरबा वनमंडल में वर्ष 2018 तेंदूपत्ता सीजन में तेंदूपत्ता संग्रहण की प्रारंभिक तैयारी पूरी कर ली गई है। जिला कोरबा यूनियन अंतर्गत प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों की संख्या 38 है। यहा कुल 90 हजार 200 तेंदूपत्ता संग्राहक परिवार है।

दूरस्थ इलाकों के विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा परिवार तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य से आय अर्जित करते है। यहा संग्रहण केंद्रों की संख्या 283 है। तेंदूपत्ता संग्रहण के पश्चात कोसाबाड़ी स्थित लघु वनोपज संघ के गोदाम, कुदमुरा सहित अन्य निजी गोदामों में भंडारण किया जाता है। कटघोरा वनमंडल में भी तेंदूपत्ता संग्रहण की तैयारी पूरी कर ली गई है। जिला कटघोरा यूनियन अंतर्गत प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों की संख्या 44 है। यहा कुल 69 हजार 800 तेंदूपत्ता संग्राहक परिवार है। दूरस्थ इलाकों के ग्रामीण परिवार तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य से आय अर्जित करते है। यहा संग्रहण केंद्रों की संख्या 474 है।

Tags

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *