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गर्भपात का बढ़ाता है खतरा प्रेग्नेंसी में हॉट टब के इस्तेमाल

सर्दियों में कई गर्भवती महिलाएं स्नान करने के लिए हॉटबॉथ-टब का इस्तेमाल करती है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक, इससे गर्भपात का खतरा हो सकता है। जी हां, गर्भावस्था में हॉटबॉथ टब में स्नान करने से मिसकैरेज का खतरा बढ़ जाता है। यहां तक कि डॉक्टर्स भी प्रेग्नेंसी में इसका प्रयोग करने से मना कर देते हैं।

वैज्ञानिक कारण

एक शोध के अनुसार, शरीर का बढ़ा हुआ तापमान पहली तिमाही में न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट की संभावना बढ़ा देता है। यही कारण है कि प्रेग्नेंसी में महिलाओं के शरीर का तापमान भी 101 डिग्री फारेनहाइट से ऊपर नहीं होना चाहिए। हॉट टब में 20 रहने से शरीर का तापमान 102 डिग्री तक बढ़ जाता है इसलिए डॉक्टर्स प्रेग्नेंसी में इसका इस्तेमाल करने से मना करते हैं।

क्या वास्तव में हॉट टब से गर्भपात हो जाता है?

जी हां, यह सही है कि वास्तव में हॉट टब का इस्तेमाल गर्भपात का कारण बनता है। गर्भवती महिला को इस दौरान 5-8 मिनट तक ही हॉट बॉथ टब लेना चाहिए।

किस महीने में होता है ज्यादा खतरा?

प्रेग्नेंसी के पहले महीने में इसका सबसे ज्यादा खतरा होता है क्योंकि इस महीने में बच्चों के अंग पूरी तरह बने नहीं होते। ऐसे में पहले महीने हॉट बॉथ टब को पूरी तरह इग्नोर करना ही आपके लिए सही है। तीसरे महीने में आप हॉट बाथ ले सकती हैं लेकिन सॉना, जकूजी और हॉट टब से बचें, ताकि इनकी गर्माहट से हार्ट रेट न बढ़ जाए।

क्या हॉट टब से बर्थ डिफेक्ट संभव है?

शोध के अनुसार, गर्भावस्था के शुरूआती दिनों में हॉट टब और सॉना का इस्तेमाल करने वाली महिलाएं ऐसे बच्चों को जन्म देती है, जिनमें ब्रेन से जुड़ी या स्पाइना बिफिडा की समस्या अधिक होती है। कई बार तो इस स्थिति की संभावना 3 गुणा तक बढ़ जाती है।

प्रेग्नेंसी में ले सकती हैं Hot Bath

अगर आप सर्दियों में गर्म पानी से स्नान करना ही चाहती है तो आप हाट बॉथ ले सकती हैं। यह बॉथ-टब की तुलना में ज्यादा सुरक्षित होता है। हालांकि इस बात का ध्यान रखें कि हॉट बाथ में भी पानी ज्यादा गर्म न हो।

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गर्भपात का बढ़ाता है खतरा प्रेग्नेंसी में हॉट टब के इस्तेमाल
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