परिवारों में बढ़ती संवादहीनता चिंताजनक: अनुपम खेर

कल नया रायपुर में जनसम्पर्क अधिकारियों की मीडिया संगोष्ठी को किया सम्बोधित

रायपुर: हिन्दी फिल्मों के जाने माने अभिनेता अनुपम खेर ने कहा है कि सूचना और संवाद के नये उपकरणों का प्रचलन बढ़ने के बाद समाज में नई और पुरानी पीढ़ी के बीच परिवारों में संवादहीनता लगातार बढ़ती जा रही है। यह स्थिति चिंताजनक है।

पद्मश्री और पद्मविभूषण सम्मानित खेर ने नया रायपुर में जनसम्पर्क अधिकारियों की मीडिया संगोष्ठी को कल देर शाम सम्बोधित करते हुए कहा कि आधुनिक जीवन शैली के बीच परिवारों में संवादहीनता बढ़ रही है। पहले घर-परिवारों में सब लोग एक साथ बैठकर खाना खाते थे,लेकिन अब अधिकांश निम्न मध्यम वर्ग और मध्यमवर्गीय परिवारों में लगभग हर सदस्य वाट्सएप और फेसबुक में व्यस्त रहने लगा है।

इस वजह से परिवार के सदस्यों के बीच संवाद कम हो रहा है। उन्होंने परिवार के सदस्यों के बीच परस्पर संवाद और सामंजस्य की जरूरत पर विशेष रूप से बल दिया। उन्होने अपने जीवन संघर्षों के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि उनका जन्म शिमला के एक निम्न मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। पिता जी वन विभाग में क्लर्क हुआ करते थे। उनका वेतन सिर्फ 90 रूपए था।

संयुक्त परिवार में कुल 14 सदस्य थे और एक बेडरूम वाले कमरे में सब मिलकर गुजारा करते थे, लेकिन सभी आपस में हंसी मजाक करते हुए हमेशा खुश रहते थे। उन्होंने कहा कि हर हाल में खुश रहना मैंने अपने माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों से सीखा। मैं आज जो कुछ भी हूं, वह अपने माता-पिता की वजह से हूं। खेर ने कहा कि आपकी खुशियां स्वयं के आपके हाथों में है। कामयाबी हासिल करने के लिए जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में हमें असफलताओं से डरना नहीं चाहिए। विफलताओं को चुनौती के रूप में लेना चाहिए। जब मैं स्कूल की कक्षाओं में फेल हो जाता था, तो उस समय भी मेरे पिता मुझे फूल भेंटकर या किसी रेस्टोरेंट में खाना खिलाकर मेरा मनोबल बढ़ाया करते थे। इस मौके पर श्री खेर को संचालक जनसम्पर्क और छत्तीसगढ़ संवाद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी राजेश सुकुमार टोप्पो ने स्मृति चिन्ह भेंटकर उनके प्रति आभार प्रकट किया।

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