मोदी सरकार के गले की फांस बनती जा रही पेट्रोल-डीज़ल की बढ़ती कीमतें

नई दिल्ली: पेट्रोल-डीज़ल की बढ़ती कीमतें मोदी सरकार के गले की फांस बनती जा रही हैं. बुधवार को लगातार दसवें दिन सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीज़ल की खुदरा कीमतें बढ़ा दीं. इस बीच सरकारी स्तर पर किसी राहत की जो उम्मीद थी, वो बेमानी निकली.

लगातार दसवें दिन पेट्रोल और डीज़ल के दाम बढ़ते रहे. बुधवार को पेट्रोल 30 पैसे लीटर महंगा हुआ और पेट्रोल 28 पैसे लीटर. दस दिन में पेट्रोल 2 रुपये 30 पैसे से लेकर 2 रुपये 50 पैसे तक महंगा हो गया. डीज़ल की बढ़ोतरी भी इसी आसपास रही.

अब कुछ शहरों में पेट्रोल और डीज़ल के दाम पर नज़र डालिए. बुधवार को परभणी में पेट्रोल 86 रुपये 68 पैसे पहुंच गया जबकि मुंबई में 84 रुपये 99 पैसे लीटर बिका. भोपाल में 82 रुपये 77 पैसे और पटना में 82 रुपये 65 पैसे चला गया. हैदराबाद, श्रीनगर, गैंगटोक, जालंधर सहित कई और शहरों में भी पेट्रोल 80 रुपये पार रहा.

डीज़ल भी कई शहरों में 75 रुपये लीटर पार रहा. मलकानगिरि, कोरापुट और चित्तौड़ जैसी जगहों पर तो 76 रुपये पार दिखा. क्या ये बढ़ोतरी सिर्फ अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल के बढ़ते दाम का नतीजा है?

तथ्य ये है कि सरकार ने भी लगातार टैक्स बढ़ाया है. नवंबर 2014 से फरवरी 2016 के बीच पेट्रोलियम पदार्थों पर एक्साइज़ ड्यूटी 9 बार बढ़ाई गई. इस दौरान एक जनवरी, 2016 से 15 फरवरी 2016 के बीच एक्साइज़ ड्यूटी 3 बार बढ़ाई गई जब कच्चा तेल घटकर 30 से 33 डालर प्रति बैरल के बीच गिर गया था.

फिक्की के मुताबिक इस दौरान पेट्रोल पर एक्साइज़ ड्यूटी 11.77 प्रति लीटर और डीज़ल पर 13.47 प्रति लीटर बढ़ाई गई. मोदी सरकार ने सिर्फ एक बार 4 अक्टूबर को 2 रूपये प्रति लीटर की कटौती पेट्रोल-डीज़ल पर की.

अब इस टैक्स पर कटौती की मांग तेज़ हो रही है. बुधवार को पूरे दिन इस बात के कयास लगते रहे कि पेट्रोलियम मंत्री तेल कंपनियों के अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे और आम लोगों को राहत देने को लेकर सरकार कोई पहल करेगी. लेकिन ऐसा हुआ नहीं.

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