हर्षोल्लास के साथ मना स्वतंत्रता दिवस

अम्बिकापुर: साई बाबा आदर्श महाविद्यालय में स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर श्री शिरडी साई शिक्षण समिति के सचिव अजय कुमार इंगोले ने ध्वजारोहण किया। उपस्थित छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए उन्होने कहा स्वतंत्रता प्राप्ति का इतिहास वर्तमान महामारी के संबंध में भी प्रेरणा लेने का है। जिस प्रकार उत्साह एवं वीरता के साथ भारत वर्ष ने स्वतंत्रता प्राप्त की उससे हमें सीखना है कि आपत्ति काल में भयहीन एवं उत्साहपूर्वक कार्य कर तथा नियमों, दिशानिर्देशों तथा अनुशासन का पालन कर हम आपदा से भी मुक्त हो जाएंगे। आज आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना की जा रही है और इस दिशा में सार्थक प्रयास भी किए जा रहे है।

हम सभी को विचार करना होगा कि अपने कार्यक्षेत्र में हम इस संकल्पना के लिए क्या प्रयास कर सकते है।शिक्षण समिति के सचिव अजय कुमार इंगोले ने कहा कि प्रत्येक परिस्थिति के दो पहलू होते है। वैश्विक महामारी के इस दौर ने जहां समाज को एक विभीषिका झेलनी पड़ रही है वहीं प्रकृति का वास्तविक स्वरूप भी सामने आया है, लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ी है। पारिवारिक सौहार्द में वृद्धि हुई है। महामारी से परोक्ष रूप से सबसे ज्यादा प्रभावित विद्यार्थी हुए है, शिक्षण कार्य से जुड़े होने के कारण हम देश की रीढ़ तैयार करते है। हमें नवीन पद्धतियों का विकास करना होगा जिससे हमारे विद्यार्थियों को सतत् सीखने एवं अध्ययन करने की बाधा को देर किया जा सके।

प्राचार्य डॉ. राजेश श्रीवास्तव ने स्वतंत्रता के मूल्यों एवं समाज की परिस्थितियों पर प्रकाश डालते हुए सभी को स्वतंत्रता दिवस की बधाई दी। अपने उद्बोधन में आपने सामाजिक दायित्वों को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने के अवसर को सर्वोपरि बताया तथा जहां एक ओर इस परिवेश में समूचा विश्व इस बात का चिन्तन कर रहा है कि प्रकृति से हमारे समन्वय में कहां कमी हुयी है, वही हमारा देश उस सनातन पद्धति की पुनरावृत्ति कि वैज्ञानिक आवश्यकता को मानने को समर्थ हो रहा है। इस अवसर पर उपस्थित रासेयो स्वयंसेवक एम.एस.डब्ल्यू. की छात्रा राधिका, बी.कॉम. भाग दो की छात्रा साक्षी अग्रवाल, बी.एससी. भाग तीन का छात्र नेमेतुल्ला आलम, बी.कॉम. भाग एक का छात्र प्रयाग प्रजापति ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए। अंत में मिष्ठान वितरण के पश्चात् कार्यक्रम समाप्त किया गया। कार्यक्रम संचालन सहायक प्राध्यापक देवेन्द्र दास सोनवानी ने किया।

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