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कोरिया की हाईस्पीड टिल्टिंग ट्रेन तकनीक मांग सकता है भारत

नई दिल्ली : भारत दक्षिण कोरिया से तेज रफ्तार पैसेंजर व फ्रेट ट्रेनों को घुमावदार ट्रैक पर सुरक्षित ढंग से चलाने में उपयोगी टिल्टिंग तकनीक हासिल कर सकता है। इस बात के संकेत रेलवे मानक एवं विकास संगठन (आरडीएसओ) तथा कोरियन रेल रोड इंस्टीट्यूट (केआरआरआइ) के बीच हुए सहयोग समझौते के दौरान दोनो तरफ के अधिकारियों से मिले हैं।

दोनो देशों के बीच रेलवे के क्षेत्र में सहयोग की आधारशिला रेलवे बोर्ड के तत्कालीन चेयरमैन अरुणेंद्र कुमार के 2014 में हुए सियोल दौरे में रखी गई थी। तब उन्होंने दक्षिण कोरिया के रेलवे उपमंत्री कू के साथ हाईस्पीड रेल, आधुनिक रोलिंग स्टॉक, रेल संचालन तथा लॉजिस्टिक पार्क एवं टर्मिनलों के निर्माण में सहयोग से संबंधित समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

इसके बाद 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दक्षिण कोरिया के दौरे ने इस आधार को पुख्ता करने का काम किया था। यही नहीं, जनवरी, 2017 में कानपुर के नजदीक पुखरायां में हुए रेल हादसे के बाद जब रेलवे की खासी किरकिरी हुई तो तत्कालीन रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने दक्षिण कोरियाई विशेषज्ञों को भारतीय ट्रैक की जांच कर सुरक्षित ट्रेन संचालन के सुझाव देने के लिए आमंत्रित किया था।

तब दक्षिण कोरियाई विशेषज्ञों ने कई अहम सुझाव दिए थे, जिनमें एक सुझाव ओवरलोडेड फ्रेट ट्रेनों के कारण ट्रैक पर पड़ रहे अतिरिक्त दबाव में कमी लाने और हल्के वैगनों के इस्तेमाल से संबधित था। उसी के बाद आरडीएसओ की टीम ने कोरिया का दौरा किया था। तभी से दक्षिण कोरिया भारत के रेल बाजार में बड़े पैमाने पर उपस्थिति दर्ज कराने को आतुर है।

दक्षिण अफ्रीका में भारत के राजदूत विक्रम के दोराईस्वामी ने कहा कि सिग्नलिंग, रोलिंग स्टॉक और फ्रेट ट्रेनों की टिल्ट तकनीक में से दक्षिण कोरिया से कौन-कौन सी तकनीक लेनी है, इस बारे में आरडीएसओ को फैसला करना है।

जहां तक हाईस्पीड ट्रेन तकनीक का सवाल है तो भारत भी कोरियाई तकनीक के प्रति उत्सुक है और इस क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहता है। दक्षिण कोरिया में हाईस्पीड ट्रेनों का संचालन कोरेल करती है और इन ट्रेनों को टिल्टिंग ट्रेन एक्सप्रेस (टीटीएक्स) अथवा हांविट-200 नाम से जाना जाता है। कोरिया से पहले स्पेन ने टैल्गो ट्रेन के रूप अपनी टिल्टिंग तकनीक भारत को देने का प्रस्ताव किया था। लेकिन बात आगे नहीं बढ़ सकी।

दक्षिण कोरिया फिलहाल भारत को मेट्रो ट्रेनों के संचालन में परोक्ष रूप से मदद कर रहा है। भारत के कई नगरों में मेट्रो ट्रेनों के लिए कोरियाई कंपनी ह्यूंडई के रोलिंग स्टॉक का इस्तेमाल किया जा रहा है।

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