अंतर्राष्ट्रीय

‘रिश्ते का नया अध्याय शुरू करे भारत-चीन’

नई दिल्ली: भारत में चीन के राजनयिक लो झाहुई ने भारत और चीन के बीच नए संबंध की वकालत की है। पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना की 68वीं सालगिरह पर आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए चीनी राजनयिक ने कहा कि भारत और चीन को पुराने पृष्ठ को बंद करके रिश्तों में नए अध्याय की शुरुआत करनी चाहिए।

उनका बयान ऐसे समय में काफी अहमियत रखता है जब डोकलाम को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति है। दोनों देशों के बीच डोकलाम को लेकर रिश्ते में खटास आ गई है।

उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध को बेहतर बनाने की दिशा में अच्छी प्रगति हुई है। ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी और दोनों नेताओं ने सहयोग और सुलह का स्पष्ट संदेश दिया है।

लो ने कहा, ‘हमें पुराने पेज को बंद कर देना चाहिए और नए अध्याय की शुरुआत करनी चाहिए। हमें एक साथ नाचना चाहिए। हमें एक और एक मिलकर ग्यारह बन जाना चाहिए।

चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक पार्टनर है। हमने द्विपक्षीय स्तर के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मामलों में काफी प्रगति की है।’

चीनी राजनयिक ने अपने एक शिक्षक प्रफेसर शू फानचंग को याद किया जो 1945 से 1978 तक पुडुचेरी में ऑरबिंदो आश्रम में रहते थे।

उन्होंने उपनिषद, भगवद गीता और शकुंतला को संस्कृत से चीनी भाषा में अनुवाद किया। उन्होंने कहा, ‘हमारे पारस्परिक संबंध में हजारों प्रमुख लोगों का योगदान रहा है जिनमें प्रफेसर शू फानचेंग, फाहियान और रबिंद्रनाथ टैगोर कुछ खास नाम हैं।

हमें कभी भी उनके योगदानों और विरासत को नहीं भूलना चाहिए। इतिहास से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं। उनके पदचिह्न पर चलकर हम आज भी बहुत कुछ कर सकते हैं।’

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