सौर ऊर्जा के क्षेत्र में साथ आए भारत-चीन, होंगे पूरी दुनिया के लीडर

भारत और चीन ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में साथ काम करने के लिए तैयार हो गए हैं।

नई दिल्ली । भारत और चीन ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में साथ काम करने के लिए तैयार हो गए हैं। अमेरिका स्थित शोध संस्थान ने मंगलवार को कहा कि भारत नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकी के नेतृत्व में दो वैश्विक लीडर के रूप में चीन के साथ काम करने के लिए तैयार है।

ऊर्जा अर्थशास्त्र और वित्तीय विश्लेषण संस्थान टिम के अध्ययन निदेशक बकली ने कहा भारत ने 2017-18 में सौर उर्जा का दोगुना 10 गीगावाट तक उत्पादन किया है और वह इस दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है। भारत 2022 तक 100 गीवाट तक उत्पादन करने की कोशिश में लगा हुआ है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के सोलर पार्कों के विकास की योजना,एक सफल मॉडल है और यह विदेशी पूंजी को अपनी तरफ आकर्षित कर रहा है।

दुनिया की सबसे बड़ी सौर परियोजना राजस्थान का भादला औद्योगिक सोलर पार्क 2,225 मेगावॉट निमार्णाधीन है। यह भारत में सबसे बड़े पूर्णत: परिचालित सौर पार्क से दोगुना है। अभी आंध्र प्रदेश में सबसे बड़ा 1,000 मेगावाट कुरनूल अल्ट्रा मेगा सौर पार्क है।

वर्ष 2017 में चीन के अनहुई प्रांत में दुनिया की सबसे बड़ी फ्लोटिंग सौर परियोजना सुंग्रो के 40 मेगावॉट के विकास को देखा गया, लेकिन सौर ऊर्जा की तेजी से बढ़ने के एक उदाहरण के रूप में, 2018 में चीन में कमीशन के लिए दो 150 मेगावाट की फ्लोटिंग सौर परियोजनाएं चल रही हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि जमीन की कमी को देखते हुए, राष्ट्रीय स्तर पर भारत की नई नीति फ्लोटिंग सौर उर्जा के लिए एक तार्किक और सराहनीय पहल है। इस पहल में 10,000 मेगावट सौर उर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। भारत की राष्ट्रीय विद्युत योजना का लक्ष्य थर्मल पावर की क्षमता को 2017 में 67 प्रतिशत और 2027 तक 43 प्रतिशत तक कम करना है।<>

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