भारत एक साम्प्रदायिक देश या साम्प्रदायिक हिंसा का देश ?

वे उस रास्ते पर जाना चाहते थे, जहां इस सब चीजों को लेकर माहौल खराब हो सकता था....क्यों? उन्हें उसी जगह क्यों जाना था ?

आज सुबह अखबार के एक हैडलाइन पर नजर पड़ी… मन विचलित हो गया। हम शान से कहते हैं कि हम भारतीय हैं, और भारत ही एक मात्र देश है जहां अलग-अगल जाति धर्म के लोग बड़ी ही शांति से बड़े प्यार से एक साथ रहते हैं, यानि अनेकता में एकता वाला देश, लेकिन उस हैडलाइन ये ने मन में कई सारे सवाल भी छोड़ दिए क्या वाकई हम सब शांति से एक साथ हैं? क्या वाकई हम सब का प्यार बरकरार है? सवाल कई हैं जवाब देने वाला कोई नहीं। अब आप सोच रहें होंगे कि वो खबर कौन सी है? तो वो हैडलाइन थी “पश्चिम बंगाल में रामनवमी जुलूस में हिंसा”

क्या था मामला

दरअसल, रामनवमी के दिन पश्चिम बंगाल में रैली निकली गई। रैली के लिए पहले से ही रास्ते तय कर दिए गए थे। तय रास्तों पर पुलिस भी तैनात थी, लेकिन रैली में शामिल कुछ लोग अब रास्ता बदलना चाहते थे। वे उस रास्ते पर जाना चाहते थे, जहां इस सब चीजों को लेकर माहौल खराब हो सकता था….क्यों? उन्हें उसी जगह क्यों जाना था ? प्रश्न तो ये भी है कि क्यों हम कोई त्योहार शांति से खुशी से नहीं मन सकते? क्यों हर त्योहार के बाद धर्म, सम्प्रदाय के नाम पर हिंसा फैला दी जाती है?

2 राज्यों में हिंसा

आपको बता दें कि ना केवल पश्चिम बंगाल में बल्कि बिहार के भी 4 जिलों में भी साम्प्रदायिक हिंसा होना परेशानी की खबर है। हालांकि शुरुआत पश्चिम बंगाल से हुई थी, लेकिन इसकी आंच अब बिहार के कई जिले भी झुलसने लगे हैं। वह की स्थिति भी कर्फ्यू जैसी हो गई है।

होने वाले हैं बोर्ड एग्जाम

स्थानीय लोगों का आम जन- जीवन अस्त -व्यस्त हो गया है, लेकिन इन सब के अलग उन्हें एक और चिंता सताए जा रही है। उनका कहना हैं कि जल्द ही उनके बच्चों के बोर्ड एग्जाम होने वाले हैं, अगर समय रहते परिस्थितियां ठीक नहीं हुई तो बच्चे एग्जाम कैसे दिलाएंगे। इस बारे में लेकर खुद विद्यर्थी भी चिंतित हैं। वे कहते हैं कि इस माहौल में पढ़ना भी मुश्किल है, एग्जाम दिलना तो नामुमकिन ही होगा।

दोनों राज्यों में हिंसा के एक ही कारण

आपको शायद जानकर हैरानी हो की दोनों ही राज्यों में हिंसा का कारण एक ही था। रामनवमी को लेकर रैलियां निकालनी थी। रूट पहले से ही तय थे। फिर भी रैली निकलने वालों को रास्ता बदलना था, जिसके चलते पुलिस और रैली में शामिल लोगों के बीच झड़प हुई और उस झड़प ने साम्प्रदायिक हिंसा का रूप ले लिया। कई को जान तक गंवानी पड़ी।

इंटरनेट सेवाएं बंद

पश्चिम बंगाल और बिहार दोनों जगह कर्फ्यू लग गया और दोनों ही जगह की इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं।

ये कैसी रैली है जो आम लोगों का जीवन अस्त व्यस्त कर दे?

अगर रास्ता पहले से ही तय है, बावजूद इसके आप रास्ता बदलते हैं तो ये रैली नहीं सरासर दादागिरी है। बम के धमाके में एक पुलिसकर्मी ने अपना हाथ खो दिया, कई पुलिसकर्मी घायल भी हुए और 2 लोगों की मौत भी हो गई है। वहीं आम आदमी जीवन तबाह हो चुका है।

अब यह तो सोचने का विषय तो है ही क्या हम अपने घर अपने आस-पास की जगह पर भी सुरक्षित हैं कि नहीं? यह एक अजीब बात है कि आज कल हर कुछ महीने बाद साम्प्रदायिक हिंसा के नाम पर लोगों की जानें जा रही हैं। यह दुखद तो है ही साथ ही यह निंदनीय भी है। इसकी ऐसी घटनाओं की जितनी निंदा की जाए कम है।

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