वांछित आरोपी के प्रत्यर्पण को लेकर भारत से बातचीत की जा रही: शरत वीरशेकरा

वांछित आरोपी के प्रत्यर्पण को लेकर भारत से बातचीत की जा रही

श्रीलंका:देश के सार्वजनिक व्यवस्था मंत्री शरत वीरशेकरा ने श्रीलंका की पूर्व राष्ट्रपति चंद्रिका भंडारनायके कुमारतुंगा की हत्या की साजिश रचे जाने के मामले में बताया है कि वांछित आरोपी के प्रत्यर्पण को लेकर भारत से बातचीत की जा रही है.

उन्होंने कहा कि इस महीने की शुरुआत में भारतीय अधिकारियों ने अपने श्रीलंकाई समकक्षों को बताया था कि तमिलनाडु पुलिस ने आरोपी किंबुला अले गुना को चेन्नई में गिरफ्तार किया है. मंत्री ने कहा कि गुना के भारत से प्रत्यर्पण के बारे में बातचीत जारी है. हत्या की नाकाम कोशिश के अलावा गुना के मादक पदार्थ तस्करों और लिट्टे से भी संबंध होने का शक है.

दरअसल 18 दिसंबर, साल 1999 को कोलंबो में एक चुनावी रैली के दौरान पूर्व राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा के काफिले पर एक महिला ने आत्मघाती हमला कर दिया था. इस घटना में कुमारतुंगा गंभीर रूप से घायल हो गई थीं.

हमले में 34 लोगों की मौत हुई थी इस हमले का आरोप लिट्टे पर लगा था, जिसमें 34 लोगों की मौत हो गई थी. ऐसा संदेह जताया गया था कि गुना हमले के बाद फरार होकर भारत (India) आ गया था.

वीरशेकरा ने ये भी बताया कि उनकी सरकार ने इंटरपोल रेड अलर्ट नोटिस का इस्तेमाल करते हुए विदेशों में रह रहे 100 से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की है. चंद्रिका भंडारनायके कुमारतुंगा की बात करें तो वह श्रीलंका की पांचवीं राष्ट्रपति थीं. जो 1994 से लेकर 2005 तक देश के राष्ट्रपति के पद पर रहीं. वह पूर्व प्रधानमंत्री की बेटी हैं. इसके साथ ही भंडारनायके 2005 तक श्रीलंका फ्रीडम पार्टी (एसएलएफपी) की नेता रही हैं.

वहीं लिट्टे (लिबरेशन टाइगर्स तमिल ईलम) की बात करें तो यह एक अलगाववादी संगठन है, जो औपचारिक रूप से श्रीलंका में है. इस संगठन ने मई 1976 में हिंसक अभियान शुरू कर दिया था. इसे 2009 में श्रीलंका की सेना ने हरा दिया था. भारत में भी इस संगठन पर प्रतिबंध लगा हुआ है. भारत की ओर से इसे नागरिकों की सुरक्षा के लिए खतरा और भारत विरोधी कहा जाता है.

भारत ने 1992 में इसपर प्रतिबंध लगाया था. जिसके बाद से इस प्रतिबंध को लगातार बढ़ाया जाता रहा है. भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या भी इसी संगठन ने की थी. जिसके बाद गैर कानूनी गतिविधि (निरोधक) अधिनियम के तहत इसपर प्रतिबंध लगाया गया. भारत ने श्रीलंका में भी इसका मुकाबला किया है.

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