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चीन से बातचीत के बीच सतर्क है भारत, वायुसेना प्रमुख एयरबेस के दौरे पर

वहीं सेना प्रमुख और वायु सेना प्रमुख सीमा पर हालात का जायजा ले रहे हैं। सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे दो दिवसीय लद्दाख दौरे पर हैं तो दूसरी तरफ वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया ने बुधवार को पूर्वी सेक्टर में स्थित एयरबेस का दौरा किया।

भारत-चीन के बीच लद्दाख में जारी सीमा विवाद के बीच भारत हर मोर्चे पर सतर्क है। एक तरफ दोनों देश चुशुल में सीमा विवाद को सुलझान के लिए ब्रिगेडियर स्तर की वार्ता कर रहे हैं। वहीं सेना प्रमुख और वायु सेना प्रमुख सीमा पर हालात का जायजा ले रहे हैं। सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे दो दिवसीय लद्दाख दौरे पर हैं तो दूसरी तरफ वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया ने बुधवार को पूर्वी सेक्टर में स्थित एयरबेस का दौरा किया।

वायुसेना प्रमुख ने किया एयरबेस का दौरा
भारतीय वायुसेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया ने बुधवार को पूर्वी सेक्टर में स्थित एयरबेस का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने परिचालन तैयारियों और वायुसेना की क्षमता की समीक्षा की। उन्होंने इन एयरबेस पर सेवारत जवानों से भी बातचीत की।

सीमा विवाद के बीच लद्दाख दौरे पर सेना प्रमुख नरवणे

सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने गुरुवार को लद्दाख का दो दिवसीय दौरा शुरू किया। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि पेंगोंग झील के दक्षिणी तट के आस-पास यथास्थिति को बदलने के चीन के हालिया प्रयासों के मद्देनजर क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति की व्यापक समीक्षा करने के मकसद से सेना प्रमुख का यह दौरा हो रहा है।

उन्होंने बताया कि क्षेत्र में सैनिकों की तैनाती का निरीक्षण कर रहे सेना के शीर्ष कमांडर जनरल नरवणे को उत्पन्न हुई स्थिति के साथ ही क्षेत्र में मुकाबले की भारत की तैयारी से अवगत कराएंगे। एक सूत्र ने कहा, लद्दाख क्षेत्र में सामरिक तैयारियों की समीक्षा के लिए चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ लेह के दो दिवसीय दौरे पर हैं।

पेंगोंग झील इलाके में उस वक्त तनाव बढ़ गया था जब चीन ने झील के दक्षिणी तट में कुछ इलाकों पर कब्जा करने का असफल प्रयास किया जिसके बाद भारत ने संवेदनशील क्षेत्र में अतिरिक्त सैनिक एवं हथियार भेजे।

चुशुल में हो रही है ब्रिगेडियर स्तर की वार्ता

भारत और चीन के बीच जारी सीमा विवाद के बीच दोनों देशों की सेनाएं पूर्वी लद्दाख के चुशुल सेक्टर में ब्रिगेडियर स्तर की वार्ता कर रही हैं। इस बैठक का आयोजन खुले क्षेत्र में हो रहा है। भारतीय सेना के सूत्रों ने इसकी जानकारी दी है। बताया गया है कि ये बैठक आम तौर एक सैन्य हट (झोपड़ी) में होने वाली सीमा कर्मियों की बैठक (बीपीएम) से उलट है।

सेना कमांडरों की बातचीत बेनतीजा
वहीं सूत्रों ने बताया कि तनाव घटाने के लिए दोनों पक्षों के सेना कमांडरों की बुधवार को हुई एक और दौर की वार्ता असफल रही। यह बातचीत करीब सात घंटे चली। सूत्रों ने यह भी बताया कि सोमवार और मंगलवार को छह घंटे से अधिक समय तक इसी तरह की वार्ता हुई, लेकिन कोई ‘ठोस नतीजा’ नहीं निकल सका।

उन्होंने बताया कि भारत ने पूर्वी लद्दाख में कई पर्वत चोटियों और स्थानों पर उपस्थिति बढ़ा कर पिछले कुछ दिनों में रणनीतिक बढ़त हासिल की है। क्षेत्र में यथास्थिति में बदलाव करने की चीन की नाकाम कोशिशों के मद्देनजर सैनिकों की तैनाती बढ़ाई गई है।

फिर की थी घुसपैठ की कोशिश

भारतीय सेना ने सोमवार को कहा कि चीनी सेना ने 29/30 अगस्त रात को पेगोंग झील के दक्षिणी तट पर एकतरफा तरीके से यथास्थिति बदलने की उकसाने वाली सैन्य गतिविधियां की लेकिन भारतीय सैनिकों ने उसके प्रयास को विफल कर दिया।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने मंगलवार को कहा कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) फिर से एक दिन पहले उकसाने वाली कार्रवाई कर रही थी जब दोनों पक्ष के कमांडर स्थिति को सामान्य बनाने के लिए वार्ता कर रहे थे।

इन प्रयासों के बाद, भारतीय सेना ने पेंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर कम से कम तीन रणनीतिक चोटियों पर अपनी उपस्थिति बढ़ा दी थी। सूत्रों ने कहा कि एहतियात के तौर पर वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के भारतीय हिस्से में पेंगोंग झील के उत्तरी तट पर सैनिकों की तैनाती में कुछ फेरबदल भी किए गए हैं।

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