कैसलेस हो रहा है भारत, डिजिटल पेमेंट की रफ्तार बढ़ी

अनुमान लगाया जा रहा है कि भारत में साल 2025 तक डिजिटल पेमेंट्स की आदत में 71.7 फीसदी तक का इजाफा हो जाएगा। वहीं, कैश और चेक से पेमेंट बस 28.3 फीसदी ही रह जाएगा।

भारत में लगातार डिजिटल पेमेंट के ट्रेंड में तेजी आ रही है। देश में साल 2016 में जब नोटबंदी हुई तो बड़े पैमाने पर लोगों ने डिजिटल पेमेंट का विकल्‍प चुना। साल 2020 से इसमें कोविड-19 महामारी की वजह से और तेजी आई है। अनुमान लगाया जा रहा है कि भारत में साल 2025 तक डिजिटल पेमेंट्स की आदत में 71.7 फीसदी तक का इजाफा हो जाएगा। वहीं, कैश और चेक से पेमेंट बस 28.3 फीसदी ही रह जाएगा।

तेजी से बढ़ रहा है डिजिटल पेमेंट
इसी क्रम में 4 नवंबर 2016 को भारत में 17,74,187 करोड़ रुपये के नोट प्रचलन में थे, जो 29 जनवरी 2021 को बढ़कर 27,80,045 करोड़ के नोट प्रचलन में होगए। देखने पर ये हमें भले ही बढ़े हुए लग रहे हैं लेकिन इनके बढ़ने की रफ्तार में भारी कमी आई है। इसका कारण सरकार द्वारा निरंतर किए जा रहे हैं डिजिटल पेमेंट के प्रयास। इसी का नतीजा है कि डिजिटल भुगतान की कुल मात्रा वित्त वर्ष 2017-18 में 1459.02 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2020-21 में 4371.18 करोड़ हो गई है। इस हिसाब से डिजिटल भुगतान 10 गुना अधिक बढ़ गया है। इतनी तेज गति से बढ़ना काफी आश्चर्यजनक है।

हर माह करोड़ों का ट्रांजेक्‍शन
ए‍क रिपोर्ट के मुताबिक गूगल पे, पेटीएम, फोन-पे और भीम एप जैसे दूसरे यूपीआई प्‍लेटफॉर्म पर हर माह करीब 1.22 बिलियन यानी करीब 122 करोड़ तक का लेनदेन होने लगा है। वहीं अगर साल 2016 यानी 5 साल पहले की स्थिति की तुलना करें तो अब इसमें 550% की बढ़ोतरी हुई है। 2016-17 में 1,004 करोड़ डिजिटल ट्रांजैक्शन होते थे। ये आंकड़ा 2020-2021 में 5,554 करोड़ पर पहुंच गया है। 2021 के अप्रैल-मई महीने में डिजिटल ट्रांजैक्शन 2020 की तुलना में 100% से ज्यादा बढ़े हैं।

अमेरिका और चीन छूटे पीछे
मार्च 2020 में 2.06 लाख करोड़ रुपए का UPI ट्रांजैक्‍शन हुआ, जो मार्च 2021 में 5.04 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया। आने वाले 5 सालों में टेक्‍नोलॉजी और बदलने वाली है। डिजिटल ट्रांजेक्‍शन के मामले में भारत ने चीन और अमेरिका को भी पीछे छोड़ दिया है। भारत में साल 2020 में 25.5 बिलियन डिजिटल ट्रांजेक्‍शन हुए तो वहीं चीन में 15.6 बिलियन, साउथ कोरिया में 6 बिलियन, थाइलैंड में 5.2 बिलियन और यूनाइटेड किंगडम में 2.8 बिलियन डिजिटल ट्रांजेक्‍शन हुए। वहीं अमेरिका का नंबर सबसे आखिरी में आया और यहां पर 1.2 बिलियन डिजिटल ट्रांजेक्‍शन हुए।

बायोमेट्रिक पेमेंट
बायोमेट्रिक टेक्‍नोलॉजी का प्रयोग इस समय बड़े पैमाने पर हो रहा है। इस टेक्‍नोलॉजी का प्रयोग अब पेमेंट वर्ल्‍ड में करने की कोशिश की जा रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक इस तरह का पेमेंट पूरी तरह से सुरक्षित हो सकेगा और बाकी माध्‍यमों की तुलना में काफी तेज होगा।

आवाज से ही होगा पेमेंट
अमेजन पे और गूगल पे जैसी बड़ी कंपनियां व्‍यॉइस बेस्‍ड ट्रांजेक्‍शन पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। अगर यह प्रयोग सफल हो जाता है तो वॉयस पेमेंट का यह तरीका बेहद सहूलियत भरा और तेज साबित होगा। हालांकि भारत में अभी इस तरह का पेमेंट मुश्किल लग रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक इस तरह के ट्र्रांजेक्शन के साथ सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षा और प्राइवेसी को लेकर है।

फेस रेकॉगनाईजेशन तकनीक
फेस रिकग्निशन टेक्नोलॉजी को डिजिटल ट्रांजेक्‍शन में लाने की तैयारी हो रही है। इस टेक्‍नोलॉजी में मोबाइल फोन की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। आपका चेहरा ही आपका बैंक अकाउंट और पासवर्ड बन जाएगा। पेमेंट के इस तरीके से कैश, कार्ड, मोबाइल का सारा झंझट ही खत्म हो जाएगा। इस तरह के पेमेंट में प्वाइंट ऑफ सेल मशीन के सामने खड़ा किया जाता है। मशीन में एक कैमरा लगा होता है, जिसमें ग्राहक की तस्वीर ली जाती है और पहचान के बाद पेमेंट ट्रांसफर हो जाता है।

टैप एंड गो पेमेंट
जल्‍द ही कार्ड को मशीन में स्‍वैप कराने वाली टेक्‍नोलॉजी भी गुजरे जमाने की बात होने वाली है। टैप एंड गो पेमेंट मोड में आपको अपना कार्ड मशीन में स्वैप कराने या पिन डालने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सिर्फ कार्ड को मशीन में टैप करिए और पेमेंट हो जाएगा। बाकी काम कार्ड में लगे ईएमवी चिप और आरएफआईडी एंटिना के जरिए सिस्टम अपने आप कर लेगा। फिलहाल सिंगापुर और दक्षिण कोरिया में टैप एंड गो पेमेंट का चलन तेजी से बढ़ रहा है। भारत में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने वीजा, मास्टरकार्ड और एनपीसीआई को टैप एंड गो पेमेंट के लिए हरी झंडी दे दी है। कई शॉपिंग स्टोर पर इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल भी किया जा रहा है। कई बैंकों ने अभी टैप पेमेंट के लिए 2000 रुपए तक की सीमा तय कर रखी है।

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