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ईरान पर प्रतिबंधों के बावजूद चाबहार बचाने में कामयाब रहा भारत

चाबहार बंदरगाह।

अमेरिका ने ईरान पर 5 नवंबर को तमाम प्रतिबंध लगा दिए लेकिन चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट को राहत दे दी है. इसे भारत की बड़ी जीत माना जा रहा है. अफगानिस्तान के विकास को देखते हुए ऐसा फैसला किया गया है. इसके साथ यह शर्त जुड़ी हुई है कि बंदरगाह से कोई ऐसा सामान नहीं भेजा जाएगा जो प्रतिबंधों की श्रेणी में आता हो.

इंडिया टुडे से बातचीत में अमेरिका स्टेट डिपार्टमेंट के एक प्रतिनिधि ने बताया कि इस शर्त पर इस प्रोजेक्ट को राहत दी गई है कि यहां से कोई भी प्रतिबंधित नहीं भेजा जाएगा. गहन विचार विमर्श के बाद चाबहार को छूट दी गई है.

अमेरिका के मंत्री माइक पॉम्पियो ने प्रतिबंध लगाते हुए कहा था कि ईरान पर आर्थिक दबाव डालना बेहद जरूरी था. इसके तहत ईरान से तेल आयात को शून्य करना है लेकिन हालात को देखते हुए 8 देशों को इससे राहत दी गई है. इनमें भारत समेत चीन, ईटली, ग्रीस, दक्षिण कोरिया, ताईवान और तुर्की शामिल हैं. ये वे देश हैं जो ईरान से तेल आयात पर क्रमशः कटौती करना जारी रखे हुए हैं.

इनमें से 2 देश तो ऐसे हैं जो ईरान से क्रूड ऑयल पर आयात पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा चुके हैं. अमेरिका सभी देशों से बात कर रहा है कि ईरान से तेल का आयात खत्म करें. 5 नवंबर को चाबहार बंदरगाह और इंटरनेशनल नॉर्थ साउथ ट्रेड कॉरिडोर (INSTC) पर सस्पेंस बना हुआ था.
मंगलवार को अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट ने कहा कि अफगानिस्तान के विकास को देखते हुए चाबहार और INSTC को प्रतिबंध से छूट दे दी गई है.

क्या है चाबहार परियोजना

ईरान में चाबहार बंदरागह को भारत डिवेलप कर रहा है. इसके बनने के बाद ईरान से सामान लाने के लिए पाकिस्तान से होकर नहीं आना पड़ेगा. बंदरगाह से अफगानिस्तान को भी फायदा होगा. 2003 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के समय इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे लेकिन कुछ कारणों से यह योजना उस समय परवान नहीं चढ़ पाई.

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